प्रदेश सरकार की यह योजना बाह्य सहायता की 1100 करोड़ रुपये की परियोजना का हिस्सा है। यह परियोजना केंद्रीय वित्त मंत्रालय में विचाराधीन है। मंत्रिमंडल का तर्क था कि भूकंप से सुरक्षा के मामले में 1100 करोड़ रुपये की परियोजना के स्वीकृत होने का इंतजार किए बिना प्रदेश सरकार अपने स्तर पर काम शुरू करे।
इससे एक फायदा यह भी होगा कि 1100 करोड़ की परियोजना के स्वीकृत होने से पहले ही काम जारी रहेगा। मंत्रिमंडल ने हर वर्ष 29 करोड़ रुपये की व्यवस्था इस योजना के लिए करने को भी अनुमति दी है।
ये काम होगा भूकंप सुरक्षा योजना में
भूकंप जोखिम का आकलन, जोखिम संबंधित जानकारी का प्रचार, राजमिस्त्री प्रशिक्षण, अभियंताओं का प्रशिक्षण, नियमन, असुरक्षित भवनों की मरम्मत, वित्तीय संस्थाओं के साथ समन्वय, भूकंप सुरक्षा ऑडिट, भूकंप पूर्व चेतावनी तंत्र, भूकंप के बाद त्वरित बचाव एवं राहत।
- लोग जागरूक होेंगे और सुरक्षा धीरे-धीरे उनकी आदत में शामिल होगी
- वर्तमान में असुरक्षित भवनों को सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
- आपदा बीमा का विस्तार होगा
- मंत्रिमंडल ने माना कि निवेश से कई गुना इससे फायदा होगा।
असुरक्षित भवनों की पहचान में आएगी तेजी
भूकंप के लिहाज से असुरक्षित भवनों की पहचान के काम में अब और तेजी आएगी। मंत्रिमंडल ने सहायक अभियंता के 30, अवर अभियंता के 30, एक संयोजक और एक सहायक संयोजक पद को सृजित करने की स्वीकृति दे दी है। ये इकाई 11 माह में असुरक्षित शासकीय और अशासकीय विद्यालय, अस्पताल, पुलिस स्टेशन, जिलाधिकारी एवं तहसील कार्यालय सहित सभी सरकारी भवनों का सर्वे करेगी। 19 हजार ऐसी इकाइयों का सर्वे किया जा चुका है। अन्य इकाइयों का सर्वे यह यूनिट करेगी। इसके लिए 3.73 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत कर लिया गया है।
एक संस्था की स्वायत्तता भी खत्म
मंत्रिमंडल ने बुधवार को आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में मर्ज करने करने की स्वीकृति भी दे दी। डीएएमसी का गठन 2001 में किया गया था। मंत्रिमंडल ने इस विलय को इस शर्त पर मंजूरी दी कि डीएमएमसी में कार्यरत कर्मियों को प्राधिकरण में समकक्ष पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। डीएमएमसी में 29 कार्मिक हैं।