छोटे-छोटे भूकंप के झटके 9 मैग्नीट्यूड के ग्रेट भूकंप की आहट भी हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इसे लेकर चिंता जताई है।
विज्ञानियों का कहना है कि जिस हिसाब से हिमालयी भूगर्भ में ऊर्जा जमा हो रही है, उससे रेक्टर स्केल पर नौ से अधिक तीव्रता वाले भूकंप का खतरा पैदा हो रहा है। इसकी कोई समय अवधि तय नहीं की जा सकती, लेकिन इसे लेकर अलर्ट रहने और भवन निर्माण में एहतियात की जरूरत है।
इसके साथ ही हिमालयी क्षेत्र की सैकड़ों सालों से सोईं भूकंप पट्टियां सक्रिय हो रही हैं। इंडियन प्लेट का यूरेशियन प्लेट के नीचे धंसने का सिलसिला जारी है जिसकी वजह से पूरे हिमालयी क्षेत्र में स्ट्रेस बढ़ रहा है। भूगर्भीय अध्ययन, जीपीएस अध्ययन और पेलियो सीइसमोलोजिकल अध्ययन से भूगर्भीय ऊर्जा के जमा होने की पुष्टि हो चुकी है।
इस ऊर्जा के जमाव से विज्ञानी रिक्टर स्केल पर 9 की तीव्रता वाले भूकंप का खतरा भांप रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के अलावा दूसरे हिमालयी क्षेत्रों की भूकंप पट्टियां भी सक्रिय हो रही हैं। इससे किसी भी समय भूकंप की शक्ल में ऊर्जा के निकलने का खतरा हो गया है।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ भूकंप विज्ञानी और भू-भौतिकी समूह अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि भूकंप आने की भविष्यवाणी तो नहीं की जा सकती, लेकि न ऊर्जा के बढ़ते जमाव से पूरे हिमालय में स्ट्रेस बढ़ रहा है।
खासतौर पर भवन निर्माण के वक्त इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए। भवन भूकंपरोधी बनाए जाएं और अलर्ट रहें। नेशनल सेंटर फॉर सीइसमोलोजी के विज्ञानी डॉ. विनीत के. गहलोत की रिपोर्ट के मुताबित देहरादून में भी ‘कपलिंग’ है। घाटी के भूगर्भ में मिट्टी पानी अधिक होने से यहां मसूरी की तुलना में अधिक तेज झटके लग सकते हैं।
भूकंप का आकलन
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कुछ तथ्य
वर्ष 1912 से 1917 के बीच 9 और इससे अधिक मैग्नीट्यूट के पांच भूकंप आए हैं। इनमें चिली का भूकंप 9.5, अलास्का का भूकंप 9.2, सुमात्रा का भूकंप 9.2, जापान का भूकंप 9 और कामचटका के भूकंप की रेक्टर स्केल पर तीव्रता 9 रही है। विज्ञानियों का कहना है कि इन सभी भूकंप से भूगर्भ की सिर्फ 40 फीसदी ऊर्जा ही निकली है। रिक्टर स्केल पर 9 की तीव्रता वाला भूकंप से हिरोशिमा जैसे 40,000 एटम बमों की ऊर्जा निकलती है।
भूकंप का आकलन
5 से 6 तीव्रता वाला मॉडरेट
6 से 6.9 तीव्रता वाला स्ट्रोंग
7 से 7.9 तीव्रता वाला मेजर
8 और इससे अधिक तीव्रता वाला भूकंप ग्रेट