भूगर्भ में यूरेशियन प्लेट के नीचे इंडियन प्लेट के धंसने की वजह से हजारों सालों से निष्क्रिय पड़ीं हिमालयी क्षेत्र की भूकंप पट्टियां सक्रिय हो गई हैं। इन पट्टियों से कभी भी भूकंपीय ऊर्जा बाहर आकर जमीन की सतह को हिला सकती है।
इंडियन प्लेट धंसने की यह क्रिया है 2400 किमी के ‘आर्क’ में चल रही है। इस रेंज में तकरीबन एक हजार भूकंप पट्टियों का अंदाजा है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान इन भूकंप पट्टियों की मैपिंग कर रहा है। इसके बाद जांच करके इन पट्टियों की सटीक उम्र पता की जाएगी।
वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों के अलावा हिमालयी क्षेत्र में काम कर रहे अमेरिका, स्विटजरलैंड के विज्ञानी भी भूकंप पट्टियों के सक्रिय होने की पुष्टि कर चुके हैं। भूगर्भ विज्ञानी हिमालय क्षेत्र में अब तक सात सौ भूकंप पट्टियों की निशानदेही कर चुके हैं।
वाडिया के विज्ञानियों ने उत्तराखंड में अब तक 98 भूकंप पट्टियों की मैपिंग कर ली है। इन पट्टियों को चिन्हित करने के बाद इन पर नजर रखी जा रही है। इन पट्टियों से कभी भी भूगर्भ के अंदर मंडरा रही इनर्जी बाहर आ सकती है। विज्ञानियों का आकलन है कि पट्टियां 10 हजार साल से पांच लाख साल पहले निष्क्रिय हो गई थीं।