आपदा का असर कम करने के लिए बनाए गए सेंडई फ्रेमवर्क के तहत प्रदेश के हर विभाग का अपना अलग आपदा प्रबंधन प्लान तैयार करेगा। इस काम में निजी एजेंसी मदद करेगी। एजेंसी के चयन के लिए टेंडर आमंत्रित किया गया है।
उत्तराखंड की अपनी राज्य और जिला आपदा प्रबंधन नीति है। इसके अलावा पीडब्लूडी, पुलिस और स्वास्थ्य महकमा समेत कुछ विभागों ने अपने स्तर से नीति तैयार की है। अब पर्यावरण में आ रहे बदलावों को देखते हुए सभी विभागों में आपदा प्रबंधन नीति बनाई जाएगी। जिन विभागों की पहले से नीति है उसमें सुधार किया जाएगा।
बता दें कि सेंडई फ्रेमवर्क में यह सुझाव दिया गया है कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण में स्थानीय सरकार, विभागों और निजी क्षेत्र की मदद ली जाए। इसको देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने यह योजना बनाई है कि प्रदेश के हर विभाग का अपना अलग स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) होगा।
इसके अलावा हर विभाग आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडई फ्रेमवर्क के क्रियान्वयन की दिशा में अपनी नीति बनाएगा। इसके तहत हर विभाग का अपना एक अलग आईआरएस (इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम) होगा।
आपदा प्रबंधन को लेकर प्रदेश में हर विभाग का अपना एक अलग स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) होगा। क्लाईमेंट चेंज और सेंडई फ्रेमवर्क को ध्यान में रखते हुए हर विभाग अपना एक अलग प्लान तैयार करेगा। इस काम में निजी एजेंसी विभागों की मदद करेगी, जिसके चयन की प्रक्रिया जारी है।
- सी रवि शंकर, अपर सचिव, आपदा प्रबंधन
क्या है सेंडई फ्रेमवर्क
2015 में जापान के सेंडई में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) का फ्रेमवर्क तैयार किया गया था। इस फ्रेमवर्क को डीआरआर पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में भारत सहित 187 देशों द्वारा स्वीकृत किया गया है। इस फ्रेमवर्क का लक्ष्य आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ-साथ जन और धन की हानि को रोकना है।