सीएम हरीश रावत कह चुके हैं कि शराब की बोतलों पर लगने वाला होलोग्राम कमजोर है, जिससे नकली शराब बिकने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में प्रदेश को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
इसके बावजूद आबकारी विभाग नया होलोग्राम तैयार नहीं कर पा रहा है। फिलहाल चौथी बार होलोग्राम की टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, पूर्व में तीन बार टेंडर प्रक्रिया चली, लेकिन हर बार मामला लटक गया।
आबकारी विभाग की ओर से शराब की बोतलों पर एक होलोग्राम चिपकाया जाता है, जो शराब असली होने की तस्दीक करता है। इससे नकली शराब बेचने की आशंका नहीं रहती है।