साथ ही इसे साझा करने के लिए कई तरह के सुरक्षातंत्र और नियम भी लागू कर दिए। इसके कई साल बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने इसे डीकोड कर न सिर्फ अमेरिकी खुफिया एजेंसी द्वारा लिए गए फोटोग्राफ और तकनीकी जानकारियां हासिल की। बल्कि अब डाटा का भी अध्ययन किया जा रहा है।
भारतीय राष्ट्रीय कार्टोग्राफी संघ (आईएनसीए) की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल नमामि गंगे परियोजना के वैज्ञानिक पीयूष गुप्ता ने बताया कि अमेरिका खुफिया एजेंसी द्वारा ली गई तस्वीरों का अध्ययन किया जा रहा है।
इन तस्वीरों से इस बात का पता लगाया जा रहा है कि वर्ष 1958 से वर्ष 1962 के बीच राष्ट्रीय नदी में कहां पर कितना जल था? वर्तमान में नदी का क्षेत्रफल कितना कम हुआ है? इस डाटा के आधार पर परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रमों को लागू कराने में सहूलियतें हो रही हैं।
वरिष्ठ वैज्ञानिक पीयूष गुप्ता ने बताया कि सीआईए ने वर्ष 1960 के दशक में इस बात का आकलन कर लिया था कि अमेरिका, भारत समेत कई देशों में कुछ दशकों के बाद गंभीर जल संकट खड़ा होगा। इसी संकट को लेकर खुफिया एजेंसी ने अध्ययन किया था। हालांकि अमेरिका ने इस जानकारी को आज तक भारत से साझा नहीं किया।