शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी
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शिक्षा विभाग में अशासकीय स्कूलों के टीचरों को नियमित किए जाने के मामले में दोहरी नीति अपनाई जा रही है। कुमाऊं में तदर्थ शिक्षकों को नियमित किया जा चुका है। वहीं, गढ़वाल मंडल के टीचर स्कूलों में 18 साल की सेवा के बावजूद नियमित नहीं हो पाए हैं।
प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ शिक्षक विद्यालय प्रबंधन की ओर से मानदेय पर रखे गए थे। इन स्कूलों में नियमित शिक्षकों की भर्ती पर रोक के चलते स्कूल प्रबंधन की ओर से रखे गए इन टीचरों को वर्ष 2009 में तदर्थ नियुक्ति मिली, लेकिन कुमाऊं मंडल के टीचरों का 2015 में विनियमितीकरण हो चुका है। जबकि गढ़वाल मंडल के तदर्थ टीचरों की अनदेखी हो रही है।
यह हाल तब है जबकि 17 नवंबर 2015 को कैबिनेट में प्रस्ताव आने के बाद इसका शासनादेश हो चुका है। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री अनिल नौटियाल ने कहा कि विभागीय स्तर पर मामले को उलझाए जाने से टीचरों में नाराजगी है। विनियमितीकरण के लिए एक ही प्रदेश में दोहरी नीति नहीं होनी चाहिए। वहीं, अपर शिक्षा निदेशक गढ़वाल मंडल रामकृष्ण उनियाल का कहना है कि तदर्थ टीचरों के मामले को दिखवाया जाएगा।
मंत्री का निर्देश भी ताक पर
प्रकरण में 19 सितंबर 2016 को शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने एक सप्ताह के भीतर विभागीय अधिकारियों को मामले के निस्तारण के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक विभागीय मंत्री के निर्देश पर भी अमल नहीं हुआ।
इनका है कहना
हमारी विभाग में 18 साल की सेवा हो चुकी है, टीचरों के विनियमितीकरण के लिए कई बार आश्वासन मिला, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ। अपर निदेशक की ओर से इस मामले में सर्वे कमेटी बनाई गई है।
- सत्य प्रकाश ममगाई, प्रांतीय अध्यक्ष उत्तराखंड तदर्थ शिक्षक एसोसिएशन