पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष का कहना था कि बस पलट जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। पिलर से टकराने के बाद भी चालक ने बस नहीं रोकी। उन्होंने बस को नहीं रुकवाया होता तो सड़क किनारे चल रहे राहगीर इसकी चपेट में आ सकते थे। उन्होंने मौके पर पुलिस प्रशासन और स्कूल प्रबंधन पर भी सवाल उठाए। कहा कि शराबी चालकों के हाथों में बस सौंपकर बच्चों की जान खतरे में डाली जा रही है। उन्होंने स्कूल बस चालकों की अल्कोमीटर से प्रतिदिन जांच कराने की मांग की।
एक घंटे तक बस में बैठने को मजबूर रहे बच्चे
पिथौरागढ़। स्कूल बस के यातायात पुलिस के चबूतरे से टकराने के बाद पुलिस ने बस को सड़क किनारे खड़ा कर दिया। इस दौरान मौके पर भारी भीड़ जुटी रही। बच्चों को एक घंटे तक भूखे-प्यासे बस में बैठे रहना पड़ा। इस दौरान बच्चे सहमे नजर आए। स्कूल की दूसरी बस आने के बाद 2 बजकर 10 मिनट पर बच्चों को घरों को भेजा गया।
30 नवंबर को टकाना में एक निजी स्कूल की बस के टायर की चपेट में आने से नर्सरी में पढ़ने वाले एक मासूम बच्चे की मौत हो गई थी। इस हादसे के लिए चालक की लापरवाही को जिम्मेदार मानते हुए गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग को लेकर ऱ् धरना-प्रदर्शन हुए थे।
इस दौरान छात्रों की सुरक्षा को लेकर पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से कई दावे किए गए थे। इस घटना के महज 18 दिन में ही एक चालक के नशे की हालत में पाए जाने पर पुलिस प्रशासन के साथ ही स्कूल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
चबूतरे से बस टकराने वाला चालक नशे में था। चालक का मेडिकल कराया गया। नशे की पुष्टि होने पर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। शराब पीकर वाहन चलाना अपराध है। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-ध्यान सिंह, कोतवाल पिथौरागढ़