इनका कहना है
फार्मा कंपनियों में मात्र पांच फीसदी प्लास्टिक पैकिंग में उपयोग होता है। कंपनियों का उत्तराखंड में आठ हजार करोड़ का निवेश और देशभर में दवा उत्पादन में 24 फीसदी हिस्सेदारी हैं। हरिद्वार से भारत के अलावा 18 देशों को दवा की सप्लाई होती है। फार्मा कंपनियां पहले से ही रूस-यूकेन युद्ध और चीन से कच्चा माल की आपूर्ति कम होने से संकट के दौर से गुजर रही हैं। अब एनओसी रद्द कर नया संकट खड़ा करवा दिया है।
- अनिल शर्मा, अध्यक्ष एसोसिएशन ऑफ फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग
- दवा कंपनियों से लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। कंपनियां बंद होते ही सब बेरोजगार हो जाएंगे। बाजार में दवाओं का संकट खड़ा हो जाएगा और आम से खास को दिक्कतों का सामना करना पडे़गा।
- सुमित अग्रवाल, महामंत्री एसोसिएशन ऑफ फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग
- उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों और सरकार से बातचीत चल रही है। कोई न कोई बीच का रास्ता निकलेगा। दवा कारखाने बंद हुए तो अर्थव्यवस्था लड़खड़ा जाएगी। उत्तराखंड में दवा उद्योग से हजारों लोग जुड़े हैं।
- आरसी जैन, फार्मा उद्यमी
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फैसले से फार्मा उद्योग से जुड़े हजारों लोग असमंजस में हैं। बोर्ड का यह गैरजिम्मेदाराना फैसला है। कुछ कहने के लिए शब्द नहीं हैं।
-
सुनील अग्रवाल, फार्मा उद्यमी
- दवाओं के पत्ते की पैकिंग में पीवीसी लगाई जाती है। सीरप की बोतलों की प्लास्टिक यूज होता है। कच्चा माल भी प्लास्टिक के कट्टे में आता है। बाहर दवाई भेजने के लिए भी प्लास्टिक की पैकिंग यूज होती है।
- निखिल गोयल, फार्मा उद्यमी
ये भी पढ़ें...IMA POP 2022: सरहद की हिफाजत की ली सौगंध, तस्वीरों में देखें युवा अफसरों का देश की रक्षा के लिए उत्साह
- उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक्शन प्लान देना चाहिए। यदि प्लान मिलता है तो उसके हिसाब से काम किया जा सकता है। इससे उद्यमियों को राहत मिल जाएगी।
- अखिल विरमानी फार्मा उद्यमी