- ड्रोन सर्विस से जुड़े उद्योगों पर भी पहले साल अधिकतम 10 लाख, दूसरे साल 7.5 लाख और तीसरे साल अधिकतम पांच लाख की सब्सिडी दी जाएगी।
- स्टार्टअप नीति के तहत 200 करोड़ के वेंचर फंड में से 15 प्रतिशत राशि ड्रोन से जुड़े निर्माण या सर्विस क्षेत्र के स्टार्टअप को दिए जाएंगे।
- ड्रोन स्कूल, रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन व ड्रोन कोर्स चलाने पर 50 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी जो कि अधिकतम एक करोड़ के निवेश पर मिलेगी।
- आईटीडीए की ओर से ड्रोन निर्माण व ड्रोन सेवा से जुड़े उद्योगों को सर्किल रेट से 50 प्रतिशत कम दरों पर जगह उपलब्ध करानी होगी।
- ऐसे उद्योगों को एसजीएसटी प्रतिपूर्ति दी जाएगी।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand Cabinet: नई एमएसएमई नीति मंजूर, अब सब्सिडी की रस्सी से पहाड़ चढ़ेंगे उद्योग, पढ़ें जरूरी बातें
-परियोजना की डीपीआर बनाने पर 50 प्रतिशत राशि की प्रतिपूर्ति सरकार करेगी, जिसकी अधिकतम सीमा पांच लाख रुपये है।
-न्यूनतम 100 करोड़ या सीधे 250 लोगों को हर साल रोजगार देने वाले उद्योगों को एमएसएमई नीति के अंतर्गत राहत प्रदान की जाएगी।
ड्रोन यहां भी काम करेगा
कृषि, खनन, बुनियादी ढांचे, परिसर निगरानी, आपातकालीन प्रतिक्रिया, परिवहन, भू-स्थानिक मानचित्रण, यातायात प्रबंधन, कानून के प्रवर्तन जैसे अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में। राज्य में ड्रोन निर्माण, अनुसंधान, विकास, प्रशिक्षण, मरम्मत और रखरखाव को प्रोत्साहन मिलेगा।