आरटीओ में पारदर्शिता के दावे तो हमेशा ही किए जाते हैं, लेकिन अफसर दलालों पर अंकुश लगाने पर पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे हैं। सारथी सॉफ्टवेयर के जरिये ड्राइविंग लाइसेंस ऑनलाइन बनाया जाता है। इस बीच उन्हें सिम्युलेटर टेस्ट से गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद दलाल डीएल बनवाने के लिए आने वाले लोगों को झांसे में लेकर मनमाना शुल्क वसूलते हैं।
जबकि सामान्य तरीके से पहुंचने वालों को धक्के खाने पड़ते हैं। सिम्युलेटर टेस्ट के लिए पहले उन्हें टोकन देकर घंटों इंतजार कराया जाता है। वहीं, एक बार नंबर छूटने पर उनका दोबारा नंबर कब आएगा इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। कभी अगले दिन बुलाया जाता है तो कभी एक महीने बाद।
ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो इसे दिखवाया जाएगा। दलालों पर भी अंकुश लगाया जाएगा।
- डीसी पठोई, आरटीओ
ये है ड्राइविंग लाइसेंस की फीस
लर्निंग
दो पहिया वाहन - 170 रुपये
दो एवं चार पहिया वाहन - 370 रुपये
स्थायी लाइसेंस
दो पहिया वाहन - 720 रुपये
दो एवं चार पहिया वाहन - 1020 रुपये
पहले लर्निंग लाइसेंस बनाया जाता है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। जिसके बाद कंप्यूटर पर लर्निंग टेस्ट होता है। इसके एक महीने बाद स्थायी लाइसेंस बनाने से पहले सिम्युलेटर टेस्ट लिया जाता है। इसे पास करने पर ही आरटीओ की ओर से लाइसेंस जारी किया जाता है।
रोजाना बनते हैं 200 लर्निंग लाइसेंस
आरटीओ में रोजाना 200 लर्निंग लाइसेंस बनाए जाते हैं, जबकि सिम्युलेटर टेस्ट के लिए रोजाना केवल 50 टोकन ही दिए जाते हैं। ऐसे में 150 लर्निंग लाइसेंस धारक कहां जाएंगे। नतीजतन यह संख्या बढ़ती ही जाती है। जिसके चलते लाइसेंस बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।