राजधानी देहरादून में प्रेमनगर क्षेत्र के केहरी गांव में भले ही लोगों की सुविधा के लिए पानी की योजना बना दी गई हो। मगर पेयजल की स्वच्छता पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
यही वजह है कि अब पानी के बहाने लोगों को बीमारियां मोल मिल रही हैं। नौबत यहां तक है कि पानी पीने के बाद यहां किसे पीलिया जकड़ ले, कोई भरोसा नहीं। जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही पर अब लोगों में आक्रोश पनप रहा है।
सेहत से खिलवाड़
लंबे समय से मांग के बाद केहरी गांव के करीब पांच सौ परिवारों को अपना पानी मिल पाया। स्वजल ने यहां टयूबवेल लगाकर पानी टैंक खड़ा किया।
6 महीने बाद भी यह योजना स्वजल के पास ही है। क्षेत्र में ग्राम प्रधान नहीं होने से योजना अब तक गांव की स्वच्छता समिति को हैंडओवर नहीं हो पाई है। स्वजल से पानी टैंक में क्लोरीन तक नहीं डाली जा रही है। ऐसे में सीधे-सीधे लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है।
इसलिए जरूरी है पानी में क्लोरीन
कीटाणुओं को मारने के लिए पानी में क्लोरीन डालना जरूरी है। पानी की स्वच्छता परखने के लिए पहली जांच क्लोरीनेशन ही होती है।
कहीं पानी गंदा पहुंच रहा है या कहीं का पानी पीकर लोग बीमार हो रहे हैं तो विभाग पहले क्लोरीनेशन टेस्ट ही कराता है। अक्सर लाइन लीकेज होने या लाइन में सीवर मिलने आदि से पानी गंदा हो जाता है। ऐसे में क्लोरीन पानी में मिली होने पर कीटाणु नहीं पनप पाएंगें।
क्लोरीन खरीदी भी नहीं गई
पेयजल योजना स्वच्छता समिति को हैंडओवर होने के बाद यह जिम्मेदारी समिति की होती है कि वह ध्यान रखे। 6 महीने से स्वजल ही इसे देख रहा है। न क्लोरीन खरीदना जरूरी समझा गया, न ही लोगों को जवाब देना। यही स्थिति रही तो धरने-प्रदर्शन का रास्ता अपनाया जाएगा।
-गीता बिष्ट, महासचिव, जिला कांग्रेस