फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand: प्रदेश के 191 स्कूलों में पेयजल संकट, गर्मी में बच्चे पानी को तरसेंगे, पिथौरागढ़ ज्यादा प्रभावित

Wed, 22 Apr 2026 07:55 AM IST
Renu Saklani बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

उत्तराखंड के 191 स्कूलों में गर्मी में बच्चे पानी को तरसेंगे। पेयजल विहीन स्कूलों के बच्चे अक्सर अपने घरों या दूरदराज के पेयजल स्रोत से पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।

विज्ञापन
पानी - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राज्य के विभिन्न जिलों में 191 स्कूल पेयजल सुविधा से वंचित हैं, जिससे गर्मी के इस मौसम में बच्चों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। यह स्थिति छात्रों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

राजकीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भौतिक आवश्यकताओं को लेकर तैयार इस रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के विभिन्न जिलों के 191 स्कूल पेयजल विहीन हैं। इसमें पिथौरागढ़ जिले के सर्वाधिक 89 स्कूल शामिल हैं, जहां छात्रों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

विज्ञापन


नैनीताल जिले में भी 43 स्कूल ऐसे हैं जो पेयजल विहीन हैं। वहीं, अल्मोड़ा जिले में 15, चंपावत जिले में 13, पौड़ी जिले में 15, रुद्रप्रयाग में दो, टिहरी गढ़वाल में एक, देहरादून में सात और उत्तरकाशी जिले में छह स्कूल ऐसे हैं। शिक्षकों के मुताबिक कुछ माध्यमिक विद्यालयों में भी पेयजल समस्या बनी हुई है।

गर्मी बढ़ने के साथ ही यह समस्या और विकट होती जा रही है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा बताते हैं कि पेयजल विहीन स्कूलों के बच्चे अक्सर अपने घरों या दूरदराज के पेयजल स्रोत से पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।

घंटी स्कूलों की नहीं पहले सिस्टम की बजे

प्रदेश में हीटवेव की चुनौतियों से निपटने के लिए मुख्य सचिव ने राज्य के सभी स्कूलों में नियमित अंतराल में वाटर बेल बजाने का आदेश दिया है। ताकि छात्र-छात्राएं पानी पी सकें लेकिन राज्य के कई स्कूल राज्य गठन के 25 साल बाद भी पेयजल विहीन हैं। ऐसे में कुछ शिक्षकों का कहना है कि सीएस का इस तरह का आदेश उन स्कूलों के लिए औचित्यहीन हैं, जो पेयजल विहीन हैं। इस तरह के आदेश से सिस्टम पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, घंटी स्कूलों की नहीं पहले सिस्टम की बजनी चाहिए।

ये भी पढे़ं...Uttarakhand: स्कूल स्तर पर ही हीटवेव एक्शन प्लान होगा तैयार, निर्देश जारी, अमर उजाला की खबर का असर

जल जीवन मिशन के तहत पेयजल विहीन स्कूलों में जब तक पेयजल की व्यवस्था नहीं होती। तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर भोजन माताओं और अभिभावक संघों की ओर से बच्चों के पीने एवं पीएम पोषण योजना के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। - पद्मेंद्र सकलानी, अपर शिक्षा निदेशक

विज्ञापन


 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें