गंगा को शवों से मुक्ति दिलाने के लिए अखाड़ा परिषद के इस प्रस्ताव पर तत्कालीन निशंक सरकार ने भी सहमति जताई थी, लेकिन भूमि का चयन नहीं हो पाया। बाद में यहीं मांग उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से प्रयाग, नासिक तथा उज्जैन कुंभ नगरों के लिए की गई।
अब अगले वर्ष होने वाले कुंभ से पूर्व अखाड़ा परिषद ने भू-समाधि के लिए भूमि हासिल करना प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था। मुख्यमंत्री से इस संबंध में तीन बार आग्रह किया गया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला और मेला प्रशासन सक्रिय हो गए हैं।
श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि हरिद्वार में भूमि मिलते ही जल समाधि बंद कर दी जाएगी। गंगा, यमुना, शिप्रा और गोदावरी को प्रदूषण मुक्त करने के काम में अखाड़ा परिषद पूर्ण योगदान देगी।