राजधानी डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाले कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रही। इस वजह से शहर के साठ में से अधिकतर वार्डों में घरों से कूड़ा नहीं उठाया गया।
कई दिनों से घरों से कूड़े का उठान नहीं होने की वजह से लोगों के घरों में कूड़े का अंबार लगने लगा है। लोग परेशान हैं कि कूड़ा क्यों नहीं उठाया जा रहा है। लोगों के लिए कूड़े को संभलाना मुश्किल हो रहा है।
वहीं, कूड़ा उठाने वाले कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को भी जारी रहेगी। नगर निगम के वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. कैलाश गुंज्याल ने हड़ताल समाप्त कराने के काफी प्रयास किए, लेकिन वित्त मामलों को लेकर कर्मी अड़ गए।
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम पिछले चार दिनों से ठप पड़ा है। वेतन भुगतान समेत कई मामलों को लेकर कर्मचारी सड़कों पर हैं। इसलिए घरों से कूड़ा नहीं उठ रहा है। हालत यह है कि अब घरों में कूड़ा सड़ने लगा है। इससे लोग परेशान हैं। इससे लोगों में नगर निगम के खिलाफ आक्रोश है।
इस बाबत, उक्रांद श्रम प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष संजय खंडूरी ने बताया कि मेयर व नगर आयुक्त का रवैया उदासीनता से भरा है। वे कूड़ा उठान कार्मिकों को न्याय देने को तैयार नहीं हैं। इससे तीन सौ से अधिक कर्मी परेशान हैं। हालांकि वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. कैलाश गुंज्याल से कई मुद्दों पर सहमति हो गई थी।
हड़ताल टूट सकती थी, लेकिन वित्त संबंधी मामलों पर नगर निगम प्रशासन के रवैये से कर्मियों में नाराजगी है। दूसरी तरफ, मेयर विनोद चमोली ने कहा कि वह हड़ताल तुड़वाने की कोशिश कर रहे हैं।
टूटते-टूटते जारी रह गई हड़ताल
वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. कैलाश गुंज्याल और आंदोलित कर्मियों में काफी देर तक वार्ता हुई। इस दौरान कई मुद्दों पर सहमति बनी। लेकिन वेतन बढ़ोतरी और ईपीएफ मुद्दे पर बात नहीं बनी।
यह उनके क्षेत्राधिकार के बाहर के मसले थे। वार्ता में संजय खंडूरी, वीरेद्र सिंह बिष्ट, जेपी उपाध्याय, संजय क्षेत्री, मुकेश कुमार, महेंद्र सिंह, रंजीत कुमार, नितिन कुमार, दीप चंद्र समेत अन्य लोग शामिल थे।