दून विश्वविद्यालय में एक छात्र की परीक्षा एक बार हुई लेकिन रिजल्ट दो बार जारी हो गया। दोनों बार छात्र के अंक भी कम हो गए। इस पर छात्र के अभिभावकों ने विवि अधिकारियों से शिकायत की तो उन्होंने गलती मानने से इनकार कर दिया।
कुलपति को पत्र लिखकर मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
विवि प्रशासन ने छात्र के आरोपों से इनकार किया है। इस पर अब उन्होंने कुलपति को पत्र लिखकर मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
दोनों दस्तावेजों पर विवि की मोहर भी लगी है
छात्र के अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विवि की गलती के कारण उनका बेटा बहुत अधिक परेशान है। उन्होंने बताया कि पहली बार विवि ने जो परिणाम दिया है, उसमें 7.08 सीजीपीए बताए गए। दूसरी बार यह घटकर 6.72 हो गया। उन्होंने बताया कि दोनों दस्तावेजों पर विवि की मोहर भी लगी है।
विवि अधिकारी अपनी गलती मानने और सुधारने के लिए तैयार नहीं
उन्होंने कहा कि इस मामले में अधिकारियों से शिकायत की गई तो उन्होंने खुद को पाक साफ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विवि अधिकारी अपनी गलती मानने और सुधारने के लिए तैयार नहीं हैं। अपने अड़ियल रवैये से वो बच्चे का मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं। इसके अलावा अधिकारियों की मनमानी के कारण उनके बेटे का उच्च कक्षा में प्रवेश भी नहीं हो पाया।
कुलपति डंगवाल का किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार
वहीं, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने सभी आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों को बुलाकर उनसे जानकारी ली गई है। उन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। उन्होंने यह बताया कि जो कागज साक्ष्य के रूप में दिया जा रहा है, उसमें न तो विवि की मुहर है और न ही किसी के हस्ताक्षर हैं।