फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर रही दून की नजर

विज्ञापन
विज्ञापन
देहरादून। अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव परिणाम लगभग अंतिम दौर में है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बदलाव या राजनीतिक घटनाक्रम का भारत पर क्या असर पड़ेगा। परिणाम जानने के लिए दूनवासी भी बृहस्पतिवार को टीवी के चैनल बदलते रहे। अमेरिकी राजनीति के भारत पर असर के बाबत दून के कई पूर्व सैन्य अधिकारियों और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार अमर उजाला से साझा किए। पूर्व सैन्य अधिकारियों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि अमेरिका में राष्ट्रपति चाहे कोई भी हो, भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखना वर्तमान परिपेक्ष में बेहद अहम हैं।
विज्ञापन

सेवानिवृत्त प्रमुख वन संरक्षक रश्मिकांत शुक्ला का कहना है कि रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार व वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कई नीतियां भारत के लिए लाभकारी नहीं थी। एच-वन वीजा को लेकर ट्रंप काफी सख्त रुख अख्तियार करते रहे हैं। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी जो बाइडन की नीतियां भारत को लेकर काफी उदार रही हैं। अमेरिका में रहने वाले ज्यादातर भारतीयों ने बाइडेन के पक्ष में ही मतदान किया है। बाइडेन का राष्ट्रपति चुनाव जीतना भारत के हित में साबित होगा।
सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जीएस नेगी का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव तमाम नजरिए से अहम है। फिलवक्त राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अपने प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन से काफी पीछे हैं। हालांकि भारत के दृष्टिकोण से यह ठीक नहीं है। ट्रंप की भारत को लेकर विदेश नीति बीते चार सालों में बहुत ही अच्छी रही है। वहां जो बाइडेन धारा 370 समेत तमाम मुद्दों पर खुलकर भारत के विरोध में बयानबाजी करते रहे।
विज्ञापन

सेवानिवृत्त अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल बीएम थापा ने कहा कि डेमोक्रेट पार्टी के राष्ट्रपतियों की तुलना में रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपतियों की नीतियां भारत को लेकर काफी उदार रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े राष्ट्रपतियों ने भारत का खुलकर साथ दिया। ऐसे में यदि डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीतते तो यह भारतीय दृष्टिकोण से बेहतर होता है।
सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर केजी बहल भी दिनभर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बारे में टीवी के जरिए खबर लेते रहे। ब्रिगेडियर केजी बहल का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी व डोनाल्ड ट्रंप के बीच बेहतर समन्वय रहा है। इसका असर तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दिखा, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी पार्टी का प्रत्याशी चुनाव जीते, भारत के साथ बेहतर संबंध रखना उसकी मजबूरी है। दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. मीनाक्षी सिंघल का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी बहुत दिलचस्पी है। राष्ट्रपति के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप का अपने प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन से पीछे होना भारतीय दृष्टिकोण से थोड़ा ठीक नहीं है। कारण कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां सदैव भारत के साथ रही हैं और उन्होंने तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का खुलकर समर्थन किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें