दून मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्रों को प्रताड़ित करने की घटनाएं हैरत में डाल रहीं है। 12 जनवरी को ही हुए झगड़े में एक और छात्र को कॉलेज प्रबंधन ने हॉस्टल से निष्कासित किया है। एनएमसी ने नए सिरे से इस मामले में जवाब तलब किया है।
छात्रों की प्रताड़ना के शोर के बीच कॉलेज प्रबंधन पूरी तरह चुप है। जिम्मेदार मामलों पर पर्दा डालने में पूरी ऊर्जा लगा रहे हैं। यह सिलसिला 12 जनवरी को शुरू हुआ था। रैगिंग के एक मामले में कमेटी की सिफारिश पर नौ छात्रों को कॉलेज से निष्कासित किया गया है। इसकी शिकायत घटना के अगले दिन ही प्रबंधन के पास पहुंचने के बावजूद इसे 15 जनवरी को एंटी रैगिंग कमेटी के पास भेजा गया था। इसी के दूसरे मामले में पीड़ित छात्रों ने मिलकर एनएमसी को शिकायत की थी।
इसके बाद एनएमसी ने कॉलेज से जवाब तलब किया है। इस तरह की घटनाएं सामने आने के बाद भी कॉलेज प्रबंधन जागने को तैयार नहीं है। इतना ही नहीं कॉलेज प्रबंधन ने अब तक इसकी रोकथाम के लिए कोई भी ठोस रणनीति सार्वजनिक नहीं की है।
Iएचएनबी विवि छात्रों के लिए चिंतित
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एचएनबी मेडिकल विश्वविद्यालय दून मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों के लिए काफी चिंतित है। विवि का मानना है कि रैगिंग की सबसे अधिक घटनाएं सिर्फ दून मेडिकल कॉलेज से ही आ रही हैं। इसके लिए उन्होंने प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। विवि के रजिस्ट्रार डॉ. आशीष उनियाल के अनुसार प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए हॉस्टल और मेस बिल्कुल अलग रखने की व्यवस्था है। इतना ही नहीं जूनियर छात्रों के हॉस्टल से कक्षाओं तक जाने के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है लेकिन दून मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल रही है। इस तरह की घटनाओं से पूरे कॉलेज के छात्र मानसिक रूप से परेशान होते हैं। इसका असर उनके अकादमिक प्रदर्शन पर भी पड़ता है।
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Iमीडिया सेल के पास घटनाओं की कोई जानकारी नहीं
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दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने अधिकारियों की ओर से मीडिया में जानकारी देने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। कोई भी सूचना जारी करने के लिए मीडिया सेल का गठन कर चार लोगों को जिम्मेदारी सौंपी है लेकिन इन अधिकारियों के पास भी घटनाओं की कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
Iदून मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्रों के साथ हुई रैगिंग की घटना परेशान करने वाली है। कॉलेज प्रबंधन की जवाबदेही तय करेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इसको रोकने की दिशा में काम करें। - डॉ. अजय आर्या, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा विभाग उत्तराखंडI