टीबी के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए दून अस्पताल में 40 बेड का विशेष टीबी वार्ड तैयार किया जा रहा है। वार्ड में जल्द ही मरीजों के भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि कोरोना से ठीक होने के बाद कई मरीजों में टीबी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हिदायत दी गई है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के ठीक होने के बाद न सिर्फ उनकी टीबी बीमारी की जांच कराई जाए, वरन जिन मरीजों को टीबी है उनके इलाज के भी पुख्ता इंतजाम किए जाएं। बताया कि टीबी से जूझ रहे मरीजों के इलाज में दिक्कत न हो इसके लिए मेडिकल कॉलेज के डॉ. अनुराग अग्रवाल की अगुवाई में विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम भी गठित की गई है।
प्राचार्य का कहना है कि कोरोना के चलते टीबी से जूझ रहे मरीजों के इलाज पर कम फोकस हो पाया, लेकिन अब कोरोना को लेकर स्थितियां सामान्य हो गई हैं तो नए सिरे से टीबी मरीजों के इलाज को लेकर पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए भी पुख्ता इंतजाम
प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के सबसे अधिक संक्रमित होने के मद्देनजर दून अस्पताल में इलाज के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। अस्पताल में बच्चों के लिए अतिरिक्त पीडियाट्रिक वार्ड और बेड की व्यवस्था करने के साथ ही दवाइयों की भी व्यवस्था की जा रही है। 18 साल तक के बच्चों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है और श्रेणीवार बच्चों के लिए दवाइयों की व्यवस्था है। अस्पताल में ऑक्सीजन की किल्लत न हो इसके लिए तीन नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिनसे जल्द ही ऑक्सीजन उत्पादन शुरू किया जाएगा।