राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल की पैथोलॉजी में सैंपलिंग ना होने का आरोप लगाते हुए मरीज पिछले कई दिनों से हंगामा भले ही कर रहे हों लेकिन इसमें कर्मचारियों की कोई गलती नहीं है। बल्कि यहां के लैब टेक्नीशियन तो प्रदेश में सबसे ज्यादा समय तक ड्यूटी करते हैं। डेंगू-वायरल या अन्य बीमारियों के बढ़ने पर उनकी ड्यूटी का समय भी बढ़ जाता है।
प्रदेश में सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉबी लैब में कर्मियों की ड्यूटी और सैंपल लिए जाने का समय तय है। अस्पताल कर्मियों को सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ड्यूटी करनी होती है। इसके अलावा सभी सरकारी अस्पतालों में गर्मियों में सुबह आठ बजे से 11 बजे तक और सर्दियों में सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक का समय सैंपल लेने के लिए तय है। इसके बाद लिए गए सैंपल की जांच और रिपोर्ट तैयार की जाती है।
इसके बाद तीन घंटे में टेक्नीशियन सैंपलों की जांच कर उनकी रिपोर्ट तैयार करते हैं। लेकिन टीचिंग अस्पताल में गर्मियों में सुबह आठ से दोपहर साढ़े बारह और सर्दियों में सुबह नौ से अपराह्न डेढ़ बजे तक सैंपल लेते हैं। इसके बाद अगले साढ़े तीन घंटे में सैंपल की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाती है।
लैब कर्मियों के अनुसार अस्पताल में मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण उन्हें हमेशा अतिरिक्त समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। सैंपल ज्यादा होने के कारण वह निर्धारित ड्यूटी समय से औसतन दो घंटे अधिक काम करते हैं।
मरीजों को किसी तरह की परेशानी ना हो इसलिए कर्मचारी दो से तीन घंटे तक अतिरिक्त काम कर रहे हैं। जांच और रिपोर्ट तैयार करने वाले कर्मियों को आजकल रात तक काम करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में डिपार्टमेंट बढ़ने और महिला अस्पताल की लैब भी मर्ज होने के कारण दबाव बढ़ा है।
रूटीन काम करेंगे सब टेक्नीशियन
टीचिंग अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने पर मेडिकल कॉलेज से छह टेक्नीशियन और एक कंप्यूटर ऑपरेटर भेजा गया है। बताया जा रहा है कि इनमें से दो टेक्नीशियन को डेंगू हो गया है। वहीं चार अन्य टेक्नीशियन केवल सैंपल लेने का काम कर रहे हैं। इसको लेकर लैब कर्मियों ने बुधवार को चिकित्साधीक्षक से मुलाकात कर विरोध जताया। इस पर चिकित्साधीक्षक डा. केके टम्टा ने सभी टेक्नीशियन को रूटीन काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज से आए टेक्नीशियन भी जांच करेंगे।
डॉक्टरों पर बरसे कर्मचारी
लैब कर्मियों का गुस्सा बुधवार को पैथोलॉजिस्ट डा. एनके मिश्रा समेत अन्य चिकित्सकों पर फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि ज्यादातर डॉक्टर ओपीडी में सुबह साढ़े नौ बजे के बाद पहुंच रहे हैं। ऐसे में मरीजों की जांच में देरी हो रही है। इसके चलते भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पैथोलॉजी के डॉक्टर खुद 11 बजे अस्पताल पहुंचते हैं और रिपोर्ट साइन करने के अलावा कुछ नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें दो घंटे अतिरिक्त ड्यूटी के लिए कहा जा रहा है लेकिन अधिकांश डॉक्टर तय समय तक भी ड्यूटी नहीं कर रहे हैं।
प्राइवेट से जांच करवा रहे डॉक्टर
विरोध जताने वाले कर्मियों ने अस्पताल के कई डॉक्टरों पर मरीजों की जांच प्राइवेट अस्पताल से करवाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ज्यादातर भर्ती मरीजों की जांच प्राइवेट अस्पतालों से करवाई जा रही है। कमीशन के लालच में कुछ डॉक्टर दून अस्पताल की जांच रिपोर्ट ना मानने की बात कहते हुए प्राइवेट से जांच करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लैब कर्मचारी अस्पताल में भर्ती मरीजों के सैंपल ले रहे हैं।