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बड़े अस्पतालों का हाल: मशीन खराब, मरीज बेहाल, अस्पताल कंगाल

Sat, 04 Mar 2017 01:49 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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दून अस्पताल - फोटो : file photo
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कहने को तो दून अस्पताल राजधानी का सबसे बड़ा अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की गिनती में शुमार है,लेकिन इसकी असल तस्वीर कुछ और ही है। 
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज टीचिंग अस्पताल में तमाम मशीनों के खराब होने का खामियाजा केवल मरीजों को नहीं बल्कि अस्पताल को भी भुगतना पड़ रहा है। मरीजों को जहां जांच के लिए प्राइवेट अस्पतालों में कई गुना ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है, वहीं अस्पताल की आय पर भी इसका असर पड़ा है। अकेले सीटी स्कैन मशीन खराब होने से अस्पताल को हर माह 10 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है।

टीचिंग अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन पिछले करीब तीन माह से खराब पड़ी है। यहां सिर के सीटी स्कैन के करीब 1418 रुपये और अन्य अंगों के सीटी स्कैन के करीब 2126 रुपये लिए जाते हैं।
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रोजाना करीब 40 से 45 मरीजों का सीटी स्कैन होता है, जिसमें से करीब 15 से 20 बीपीएल और एमएसबीवाई मरीज होते हैं। उनके लिए यह सेवा पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध है। ऐसे में अस्पताल को इससे प्रतिमाह करीब 10 लाख रुपये का फटका लग रहा है। 

दूसरी ओर इको की मशीन करीब छह माह से खराब पड़ी है। अस्पताल में इको जांच के लिए 354 रुपये लिए जाते हैं। हालांकि इस जांच को करवाने वाले मरीजों की संख्या काफी कम होती है। फिर भी इससे अस्पताल की आय घट रही है। पिछले कुछ दिनों से अस्पताल की बायोकैमिस्ट्री जांच की फुली ऑटोमैटिक मशीन भी खराब है।  

बायोकैमिस्ट्री की सभी जांचें करीब साढ़े तीन सौ रुपये की होती है। रोजाना 100 से 125 मरीजों की यह जांच होती है। ऐसे में मशीन के खराब होने से तीस हजार से अधिक का नुकसान हो रहा है। 

सीटी स्कैन मशीन की एएमसी के लिए बजट मंजूर हो गया है। बजट मिलते ही मशीन की मरम्मत कर ली जाएगी। मशीन ठीक होने से जहां मरीजों को लाभ मिलेगा, वहीं अस्पताल का नुकसान भी कम होगा।
-डा. प्रदीप भारती गुप्ता, प्राचार्य, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज
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कोरोनेशन अस्पताल में इमरजेंसी तक ठप

- फोटो : file photo
प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में तो छोड़िये राजधानी के अस्पतालों में तक मरीजों को इमरजेंसी सुविधा नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि कोरोनेशन अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल आफिसर (ईएमओ) के दोनों पद खाली चल रहे हैं। वहीं कई अन्य चिकित्सकों के पद भी लंबे समय से खाली हैं। 

सरकार हमेशा पहाड़ के अस्पतालों में डॉक्टर भेजने का दावा करती है। लेकिन असलियत यह है कि राजधानी देहरादून के अस्पताल तक में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। शहर के दूसरे सबसे प्रमुख अस्पताल कोरोनेशन में इमरजेंसी मेडिकल आफिसर, फिजिशियन, सर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन तक के पद खाली चल रहे हैं। 

अस्पताल में ईएमओ और फिजिशियन के दो-दो पद स्वीकृत हैं। इनमें से दो इएमओ और एकमात्र फिजिशियन की तैनाती कांट्रेक्ट पर की गई थी। इसमें से एक ईएमओ पहले ही छुट्टी पर चल रहे थे। 28 फरवरी को ईएमओ डा. जगदीश जोशी और फिजिशियन डा. डीपी जोशी का कांट्रेक्ट भी खत्म हो गया। इसके बाद से अस्पताल में एक भी ईएमओ और फिजिशियन नहीं है। वहीं एक सर्जन और एक ऑर्थोपेडिक सर्जन का पद भी लंबे समय से खाली चल रहा है। इसके चलते मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। 

चिकित्सकों के कांट्रेक्ट रिन्यूवल के संबंध में स्वास्थ्य महानिदेशालय को लिखा गया है। अन्य रिक्त पदों पर भर्ती के लिए भी कई बार कहा जा चुका है। फिलहाल स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को रोटेशन पर इमरजेंसी में बैठाया जा रहा है। 
-डा. एलसी पुनेठा, चिकित्साधीक्षक
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