दून अस्पताल में भर्ती मरीज ठंड में ठिठुरने के लिए मजबूर हैं। अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टरों, कर्मचारियों के कक्ष में तो हीटर लगवा दिए लेकिन मरीजों के वार्डों में ठंड से बचाव के ठोस इंतजाम नहीं किए हैं।
सरकारी अस्पतालों में अमूमन दिसंबर का महीना शुरू होते ही वार्डों में हीटर की व्यवस्था कर दी जाती है। लेकिन तापमान में लगातार गिरावट के बावजूद इस बार अस्पताल प्रबंधन हीटर की व्यवस्था नहीं कर पाया है। जनरल वार्ड में भर्ती हुई सांस की बीमारी से पीड़ित रायपुर निवासी बुजुर्ग महिला ने शुक्रवार को बताया कि रात को ठंड से दिक्कत ज्यादा हो जाती है। दवा लेने के बावजूद सांस की परेशानी कम नहीं हो रही है।
चीरफाड़ वार्ड से जनरल वार्ड में भर्ती किए गए डोईवाला निवासी राजीव ने भी ठंड से दिक्कत की बात कही। मरीज रोजाना वार्ड में मौजूद कर्मचारियों से गुहार लगाते हैं। कर्मचारियों का कहना था कि मरीजों की समस्या से प्रबंधन को अवगत करा दिया गया है। वहीं, डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों के कक्षों में एक हफ्ते पहले ही हीटर की व्यवस्था की जा चुकी है।
जानलेवा भी हो सकती है ठंड
महंत इंद्रेश अस्पताल के फिजीशियन डा. एसपी सिंह के अनुसार, सामान्य व्यक्ति को भी बढ़ती ठंड में एहतियात की जरूरत होती है। मरीजों का तो खास ख्याल रखा जाना चाहिए। ठंड से रक्तचाप अनियंत्रित, हृदयाघात होने का डर रहता है। ठंड जानलेवा भी सकती है।
जो हीटर खराब हुए हैं उन्हें ठीक कराया जा रहा है। जल्द ही सभी वार्डों में हीटर की व्यवस्था कर दी जाएगी।
- डा. डीएस रावत, कार्यवाहक प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पताल