फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सफाई के मामले में पिछड़ा दून, मिला 61वां स्थान

Wed, 17 Feb 2016 09:42 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
शहरी विकास मंत्रालय की ओर से देशभर के 73 नगरों (दस लाख से अधिक आबादी वाले नगरों) पर किए गए स्वच्छता संबंधी सर्वेक्षण में देहरादून 61वें स्थान पर पहुंचा है।
विज्ञापन


भारतीय गुणवत्ता परिषद ने सर्वेक्षण कराया था। एक समय भारत के स्कॉटलैंड के तौर पहचान रखने वाला दून अब मेरठ-सहारनपुर सरीखा ज्यादा लगता है। इसके बाद भी भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

बदतर होती हालत के लिए इस्तीफा दें मेयर : धस्माना
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वर्ष 2013 में नगर निगम मेयर पद के प्रत्याशी रहे सूर्यकांत धस्माना ने पत्रकार वार्ता कर दून के खराब हालात के लिए मेयर विनोद चमोली से इस्तीफा मांगा है। उनका कहना है कि विनोद चमोली दो मर्तबा मेयर रहे हैं लेकिन उनके कार्यकाल में दून लगातार बदसूरती-गंदगी की ओर बढ़ता रहा है।
विज्ञापन


साफ-सफाई, कूड़ा प्रबंधन, सुंदरीकरण, सार्वजनिक शौचालयों, कूड़ा उठान, शहर को गंदगी व बदबू से मुक्त कराने के मामले में नगर निगम पूरी तरह विफल रहा है। दून को लगातार गंदला और बदसूरत बनाया जा रहा है। दून की घनघोर उपेक्षा हो रही है। वार्डों में मुकम्मल सफाई और सुव्यवस्था का नामों निशान तक नहीं है।

धस्माना ने कहा कि हर तरह के वित्तीय सहयोग और सहायता के बावजूद दून के बदसूरत होते जाने के लिए मेयर और नगर निगम जिम्मेदार हैं। मेयर नगर से सरोकार ही नहीं रखते। वे नगर का भ्रमण तक नहीं करते। चुनाव के दौरान जो वादे उन्होंने किए थे अब उस पर श्वेत-पत्र जारी करना चाहिए। अगर उनमें साहस है तो नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।

खराब रैंकिंग के लिए सरकार दोषी : चमोली
देहरादून मेयर विनोद चमोली ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के परिणामों को वह स्वीकार करते हैं। रैंकिंग में छह कंपोनेंट थे। ट्रंचिंग ग्राउंड, नगर निगम में मानव संसाधन की स्थिति, सार्वजनिक शौचालय, स्वीपिंग और लिफ्टिंग। ट्रंचिंग ग्राउंड, मानव संसाधन व सार्वजनिक शौचालय में देहरादून बहुत पिछड़ गया है।

इसमें हमें नकारात्मक अंक मिले हैं। डोर टू डोर कलेक्शन, स्वीपिंग और लिफ्टिंग में दून को साठ से अधिक अंक प्राप्त हुए हैं। पिछले अक्तूबर में किए गए सर्वेक्षण के बाद हम सात पायदान ऊपर पहुंचे हैं। हालात सुधारने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

सरकार से सहयोग मांगा जा रहा है लेकिन वह उपेक्षा व उत्पीड़न में लगी है। मेयर ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, मानव संसाधन व सार्वजनिक शौचालय के मामलों में सरकार को सक्रिय होना होगा। नगर निगम भी अपने स्तर पर कोशिश कर रहा है। इस मामले में असली दोषी सरकार है।
विज्ञापन


साफ-सफाई संबंधी मुख्य बातें
- आबादी बढ़ने के अनुरूप नहीं बनी साफ-सफाई की विकेंद्रित योजनाएं।
- साफ सफाई के मामले में बहुत खराब हालत में है दून।
- तय ट्रंचिंग मैदान के अलावा जगह जगह फेंका जाता है कूड़ा।
- सॉलिंड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित नहीं हुआ।
- नगर के पार्कों की स्थिति खराब।
- सामूहिक स्वीपिंग की दशा बहुत खराब।
- सार्वजनिक शौचालयों की भारी कमी।
- हजारों करते हैं खुले में शौचालय।
- नगर निगम में मानव संसाधन की भारी कमी।
- धूलगर्द वाला नगर बन गया है दून।
- कूड़ा प्रबंधन का नहीं है उचित इंतजाम।
- नाली नालों में हफ्तों-महीनों पड़ा रहता है कूड़ा।
- साफ-सफाई का कभी भी नहीं चला अभियान।
- मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पर भी फेल है व्यवस्था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें