अमेरिका के भावी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जीतने के बाद पेरिस समझौता निरस्त करने का चुनावी वादा किया था, लेकिन इसका प्रभाव मोरक्को की कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी)-22 में नहीं दिखा। यहां जुटे देशों ने जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के प्रति प्रतिबद्धता जताई और इसके क्रियान्वयन का संकल्प लिया।
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) देहरादून ने यहां फारेस्ट एजेंडा प्रस्तुत किया। इस पर अगले साल बॉन, जर्मनी में होने वाली सीओपी-23 में निर्णय लिया जाएगा। जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते का ब्लू प्रिंट तैयार करने के लिए मोरक्को में सात से 18 नवंबर तक विश्व के डेढ़ सौ अधिक देशों की पहली बैठक हुई थी। इसमें समझौते को लागू किए जाने के लिए फंड की व्यवस्था, ब्लू प्रिंट आदि पर चर्चा हुई।
लेकिन यह आशंका बनी हुई थी कि ट्रंप के अमेरिका में चुनाव जीतने के बाद इस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कारण कि ट्रंप राष्ट्रपति बराक ओबामा के क्लीन पावर प्लान को निरस्त करके कोयला उद्योग को फिर से जीवित करने की घोषणा कर चुके थे। लेकिन कान्फ्रेंस में इसका कोई असर दिखाई नहीं दिया।