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डॉक्टर और नर्सों की हड़ताल, मरीज बेहाल

Mon, 23 Dec 2013 11:02 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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प्रदेश के राजकीय जिला अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों की हड़ताल के चलते आज चिकित्सक अपने कक्षों में नहीं बैठे। मरीज दिन भर भटकते रहे। नर्सों ने भी कोई कार्य नहीं किया जिसके चलते ओपीडी से लेकर अस्पताल की सभी सेवाएं बाधित रहीं।
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प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ से जुड़े डाक्टर 14 सूत्री मांगों पर सोमवार को एक दिवसीय कार्य बहिष्कार पर रहे। दून अस्पताल, सभी जिला अस्पतालों और अन्य चिकित्सालयों में डाक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को नहीं देखा। दिन भर भटकने के बाद मरीज भटककर बैरंग वापस लौट गए।

डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन
सभी अस्पतालों में धरना प्रदर्शन किया गया। दून अस्पताल डाक्टर और प्रदेश कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने सोमवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय का घेराव कर तालाबंदी की। महानिदेशक को एक ज्ञापन भी सौंपा गया।
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इस मौके पर डा. बीएस जंगपागी, डा. एसके गोस्वामी, डा. जेएस पांगती, डा. कैलाश जोशी, डा. सरोज नैथानी सहित अन्य शामिल रहे।

नर्सों ने दी फिर आंदोलन की धमकी
उत्तराखंड नर्सेस सर्विसेज एसोसिएशन की प्रदेश महामंत्री कृष्णा रावत ने कहा कि नर्सों की पांच सूत्री मांगो पर स्वीकृति दी गई थी, लेकिन शासनादेश जारी नहीं किया गया।

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कार्यवाहक अध्यक्ष लक्ष्मी पुनेठा ने बताया कि 24 से 29 दिसंबर तक तक नर्सें अपनी तीनों समय की ड्यूटी करेंगी। इसके बावजूद मांगों का निस्तारण न हुआ तो 28 दिसंबर को आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

मसूरी में भी मरीज परेशान
डॉक्टरों की हड़ताल पूरे प्रदेश में रहीविभिन्न मांगों पर डाक्टरों के ओपीडी बहिष्कार से सेंट मेरी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मरीजों को दवाएं तक नहीं मिलीं। पैरामेडिकल स्टाफ ने भी काम नहीं किया।

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सेंट मेरी के अधीक्षक डा. विनोद नौटियाल ने बताया कि डाक्टरों ने इमरजेंसी सेवाओं में काम किया। ओपीडी ठप रहने से जौनपुर प्रखंड से आए लोगों को लौटना पड़ा।

केस - 1
रुद्रप्रयाग निवासी शैला नेगी सात दिन से दून अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है। उसे आक्सीजन दी जा रही है। सोमवार दोपहर अचानक उसकी हालत बिगड़ने लगी। उसका मास्क हट गया था।

शैला बोलने का प्रयास करती रही, लेकिन उसकी आवाज ही नहीं निकल रही थी। इस दौरान वार्ड में तैनात दो इंटर्न ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। कुछ देर बाद शैला के पति राकेश नेगी ने खुद पत्नी को मास्क लगाया।

राकेश ने बताया कि रविवार को डाक्टर ने कह दिया था कि नर्सों की हड़ताल से देखरेख नहीं हो सकेगी। डाक्टर ने शैला को रेफर करने की सलाह दी थी।

केस - 2
पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली दिगंबरी देवी पांव में तकलीफ के चलते पांच दिन पूर्व अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिगंबरी की बेटी संगीता ने बताया कि हड़ताल की वजह से अब डाक्टर रेफर करने के लिए कह रहे हैं।

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उन्होंने नाराजगी जताते हुए डाक्टरों के इलाज पर सवाल उठाया। कहा कि दिगंबरी अस्पताल आई थी तो खुद बिना सहारे के चल रही थी, लेकिन पांच दिन में डाक्टरों ने ऐसा उपचार किया कि अब वह व्हील चेयर पर आ गई हैं।

केस - 3
रायपुर से आए शिराद की पत्नी की डिलीवरी 14 दिसंबर को हो चुकी है। लेकिन तब आधी नाल ही निकाली गई। शिराद पूरी सफाई के लिए कई बार डाक्टरों के चक्कर काट चुका है, लेकिन उसे लगातार टाला जा रहा है।

शिराद का कहना है कि इतने दिनों से डाक्टर टालते आ रहे हैं, अब नर्सों की हड़ताल ने उन्हें और बहाना दे दिया है।

जनता का दर्द
पटेलनगर से पत्नी का इलाज कराने आया था, लेकिन अस्पताल बंद होने के कारण बिना जांच कराए लौटना पड़ रहा है। पत्नी के सिर में लंबे समय से दर्द की शिकायत है।
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-नीरज गुप्ता
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