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मरीजों को बनाया जा रहा बलि का बकरा

Mon, 03 Mar 2014 03:15 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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सरकारी अस्पतालों में संविदा के नाम पर अपने डॉक्टरों को फिट करने के लिए मरीजों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
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संविदा डॉक्टरों के नवीनीकरण में हो रही देरी के संबंध में अस्पताल प्रबंधन जानबूझ कर संकट की स्थिति प्रदर्शित कर रहे हैं। मरीजों की परेशानी की आड़ में सियासत यह है कि शासन पर दबाव बनाकर अपने लोगों का नवीनीकरण करा लिया जाए।

खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा
ताकि वह एक साल तक सरकार से वेतन लेते रहें। पेंशन भी लेते रहें और अपने निजी अस्पताल के लिए मरीजों की जुगाड़ भी करते रहें।

बेशक इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है लेकिन वह तो संविदा के डॉक्टरों के होते हुए भी भुगतते रहेंगे।

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दून महिला चिकित्सालय और कोरोनेशन अस्पताल में डॉक्टरों की पर्याप्त संख्या है। लेकिन यहां पर डॉक्टर नहीं होने का फर्जी संकट (क्राइसिस) प्रदर्शित करके मरीजों के इलाज में कोताही बरती जा रही है।
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यही नहीं इमरजेंसी सेवा में भी लापरवाही की जा रही है। आरोप है कि यह सब शासन पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

दून महिला चिकित्सालय का हाल
दून महिला चिकित्सालय में 12 स्त्री रोग विशेषज्ञों के अलावा एक अनेस्थेटिस्ट, एक बालरोग विशेषज्ञ और पैथोलोजिस्ट है। इसके अलावा पांच डॉक्टर संविदा पर तैनात थीं।

नियमित डॉक्टर अस्पताल में काम कर रही हैं लेकिन पांच संविदा के डॉक्टरों के जाने से प्रबंधन हाय-तौबा मचाया रहा है। अस्पताल में औसत 25 डिलेवरी प्रतिदिन होती है।

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इस लिहाज से देखा जाए तो एक डॉक्टर के हिस्से में सिर्फ दो प्रसव आते हैं। लेकिन सीएमएस डॉ. चंद्रा पंत का कहना है कि मरीजों का लोड अधिक है।

जबकि एक डाक्टर औसतन पांच से अधिक डिलेवरी करा सकता है। कुछ नियमित डॉक्टरों का आरोप है कि संविदा डॉक्टरों के नाम पर फर्जी संकट पैदा किया जा रहा है, ताकि शासन पर दबाव बनाया जा सके।

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सच तो यह है कि संविदा के डॉक्टरों में एक पूर्व डीजी की पत्नी हैं। बाकी संविदा के डॉक्टर भी पहुंच वाले हैं। आरोप है कि मरीजों के इलाज में इसलिए सुस्ती बरती जा रही है।
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कुछ भी हो लेकिन बिना एप्रेजल में 50 फीसदी से अधिक अंक पाए किसी भी संविदा डाक्टर का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। कुछ संविदा के डाक्टरों की छंटनी भी की जाएगी।
- डॉ. जेएस जोशी, महानिदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण
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