उत्तराखंड के भावी डॉक्टरों ने एमबीबीएस की च्वाइस भरने में पहाड़ से परहेज किया है। नीट की स्टेट काउंसिलिंग में आवंटित शीर्ष-100 सीटों में से एक भी एमबीबीएस की सीट श्रीनगर मेडिकल कालेज के हिस्से में नहीं आई है। आवंटन सूची के हिसाब से 192वें छात्र को श्रीनगर मेडिकल कालेज में सीट मिली है।
उत्तराखंड में पहाड़ में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा हमेशा उठता आया है। यहां सरकार के बांड पर सस्ती एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बावजूद तमाम छात्र ऐसे हैं जो कि बांड की शर्तों के हिसाब से पहाड़ की सेवा करने नहीं जाते। इसकी झलक नीट की स्टेट काउंसिलिंग में पहले चरण की सीट आवंटन में भी नजर आई। पहाड़ के होनहारों ने अपनी प्राथमिकता में या तो हल्द्वानी का मेडिकल कालेज रखा है या फिर देहरादून के मेडिकल कॉलेज।
हालात यह हैं कि शीर्ष-191 तक श्रीनगर मेडिकल कालेज के हिस्से एक भी बच्चा नहीं आया। 192वें नंबर के छात्र को एमबीबीएस की सीट वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कालेज, श्रीनगर के हिस्से आई है। होनहारों ने इसके बजाए हिमालयन इंस्टीट्यूट जौलीग्रांट और एसजीआरआर मेडिकल कालेज, देहरादून को अपनी च्वाइस में शामिल किया है।