फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand: तीन साल की बांड अवधि के बाद डॉक्टर को पीजी की अनुमति, नियम बनाने पर चल रहा विचार

Sat, 14 Oct 2023 04:32 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद बांड धारी डॉक्टर को तीन से पांच साल तक दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने की शर्त है। बांड का अनुपालन न करने वाले डॉक्टर से पूरी फीस ब्याज समेत वसूली जाती है।
विज्ञापन
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेज से बांड व्यवस्था के तहत एमबीबीएस करने वाले डॉक्टर को तीन साल की बांड अवधि के बाद पीजी की अनुमति दी जाएगी। अस्पतालों में बिना डॉक्टर के मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए शासन स्तर पर बांड धारी डॉक्टर के लिए नियम बनाने का विचार किया जा रहा है।

विज्ञापन

 

अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए मेडिकल की पढ़ाई में बांड व्यवस्था लागू है। जिसमें कम फीस पर एमबीबीएस कोर्स करने के लिए छात्रों से बांड भराया जाता है। लेकिन मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद बांड धारी डॉक्टर को तीन से पांच साल तक दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने की शर्त है।

मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा

बांड का अनुपालन न करने वाले डॉक्टर से पूरी फीस ब्याज समेत वसूली जाती है। जो डॉक्टर बांड व्यवस्था के तहत अस्पतालों में तैनात हैं, वे भी बांड अवधि से पहले पीजी कोर्स करने जा रहे हैं। जिससे अस्पतालों में डॉक्टर न होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विज्ञापन

सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को परखने के लिए कई जिलों का दौरा कर अस्पतालों में निरीक्षण किया। उन्हें अस्पतालों में डॉक्टर न होने की शिकायत मिली। जब सचिव ने डॉक्टर न होने का कारण पूछा तो पता चला कि डॉक्टर पीजी कोर्स कर रहे हैं।


ये भी पढ़ें...Uttarakhand:  एनएचएम कर्मचारियों के लिए खुशखबरी... मिलेगा पितृत्व और बाल्य देखभाल अवकाश

विज्ञापन

प्रदेश में एमबीबीएस और पीजी कोर्स में बांड की व्यवस्था है। जिसमें पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर को 3 और 5 साल तक दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने का प्रावधान है। लेकिन कई अस्पतालों में बांड के तहत तैनात डॉक्टर न होने से मरीजों को परेशानी हो रही है। इसे देखते हुए तीन साल की बांड अवधि पूरी करने के बाद डॉक्टर को पीजी की अनुमति देने पर विचार चल रहा है। -डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव स्वास्थ्य
 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें