उत्तराखंड सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़े डोबरा-चांठी पुल को लेकर लोनिवि अभी भी संवेदनशील नहीं दिखता है। जिस इंजीनियर की पुल निर्माण में अहम भूमिका रही है, उसी का एन वक्त पर तबादला कर दिया गया है।
विभाग एक ओर पुल की बारीकियों को समझने के लिए इंजीनियरों की टीम को विदेश भेजता है, वहीं अब कहा जाता है कि पुल का निर्माण तो नए इंजीनियर भी कर सकते हैं। उधर, विधायक का कहना है कि इंजीनियर का तबादला गलत हुआ है। पुल निर्माण समय पर हो सके, इसके लिए इंजीनियर को डोबरा प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया जाएगा।
टिहरी बांध की झील के ऊपर डोबरा-चांठी पुल निर्माण सरकार और इंजीनियरिंग विभाग के लिए अभी तक बड़ी चुनौती बनी हुई है। वर्ष 2006 से अब तक 10 साल बाद भी पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से प्रतापनगर के लोगों के सामने आवागमन की भारी समस्या बनी है। क्षेत्र के भारी वाहनों को 80 से 100 किमी तक लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।
सरकार के लिए चुनौती बने 135 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अब लोनिवि ने कोरियाई कंपनी की कंसलटेंसी में पूरा करने का दंभ भरा है, जिस पर एप्रोच आरसीसी वेल, टॉवर के पुराने पार्ट्स बदलने और रस्से खींचने के लिए कैटवाक कार्य चल रहा है, जो अभी तक 15 प्रतिशत ही हुआ है।
इस बीच दो साल से प्रोजेक्ट से जुड़े सीनियर इंजीनियर जो कोरिया जाकर पुल की बारीकियां सीखकर आए है, उनका तबादला करना विभाग के साथ ही प्रतापनगर के लोगों के गले नहीं उतर रहा है। विभागीय अधिकारियों का भी मानना है कि अधीक्षण अभियंता ने झील के ऊपर 440 मीटर लंबा पुल बनाने को लेकर काफी कुछ होमवर्क किया है।
स्थानांतरण शासन-प्रशासन का निर्णय है। पुल निर्माण में सभी जुटे हैं, नए इंजीनियर भी पूरा काम करेंगे और पुल का निर्माण कार्य समय पर पूरा किया जाएगा।
- केके श्रीवास्तव, चीफ इंजीनियर, लोनिवि
डोबरा-चांठी पुल निर्माण में जुटे इंजीनियर का तबादला गलत हुआ है। पुल का कार्य तय समय पर पूरा हो, इसलिए उनका स्थानांतरण निरस्त कर उन्हें डोबरा प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया जा रहा है।
- विक्रम सिंह नेगी, संसदीय सचिव व विधायक प्रतापनगर