कैलास मानसरोवर भूस्खलन से सुरक्षित है। यहां एक भी भूस्खलन जोन चिह्नित नहीं किए गए हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि चीन में जहां कैलास मानसरोवर स्थित है वह स्थान शीत मरुस्थल की श्रेणी में आता है।
कैलास मानसरोवर परिक्षेत्र के जिन शुरुआती इलाकों में भूस्खलन जोन मिले हैं, वह पिथौरागढ़ जिले में आते हैं। सबसे अधिक भूस्खलन जोन काली नदी और गोरी नदी के बीच में पाए गए हैं। नेपाल सीमा में आने वाले काली नदी के क्षेत्र में भी कुछ भूस्खलन जोन चिह्नित किए गए हैं।
कैलास भू परिक्षेत्र तीन देश भारत, चीन और नेपाल में फैला हुआ है। परिक्षेत्र के विकास के लिए ये तीनों देश मिल कर कार्य कर रहे हैं। कैलास मानसरोवर चीन में हैं और इस परिक्षेत्र की शुरुआत उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद से होती है। प्री मानसून वर्षा के साथ हिमालय के विभिन्न क्षेत्रों में भूस्खलन होने लगा है।
इस पर तीनों देशों ने अलग-अलग भूस्खलन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों का मुआयना शुरू कर दिया है। इसमें सबसे अधिक भूस्खलन वाले क्षेत्र पिथौरागढ़ में मिले हैं। यहां 500 भूस्खलन क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं। इनमें करीब 200 क्षेत्र काली और गोरी नदी के बीच में हैं।
नेपाल स्थित संस्था इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेंन डवलपमेंट कैलास भू परियोजना का कोआर्डिनेशन कर रही है। तीनों देश अपने हिस्से में आने वाले कैलाश भू परिक्षेत्र का विज्ञानियों से सर्वे करा रहे हैं। भारत के हिस्से में आने वाले परिक्षेत्र के भूस्खलन जोन का आंकड़ा उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) तैयार कर रहा है।
परिक्षेत्र के सर्वेक्षणों की रिपोर्ट कोआर्डिनेशन एजेंसी के माध्यम से संबंधित देश की सरकार को भेजी जाएगी। यूसैक के विज्ञानी डा. गजेंद्र सिंह ने बताया कि पिथौरागढ़ क्षेत्र में चिह्नित भूस्खलन जोन में जनपद के 36 गांव प्रभावित हैं।