धामीगौड़ा से नेपाल सीमा पर स्थित और डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र के अंतिम मतदान केंद्र दोबांस पहुंचते समय ऐसा लगता है, जैसे पाताल में उतर रहे हैं।
12 किलोमीटर पैदल चलने के बाद यहां से आसमान देखा तो बहुत छोटा दिखा। दरअसल चारों तरफ की ऊंची पहाड़ियों ने आकाश का आकार कम कर दिया है।
नदी के पार दिखते हैं नेपाल के गांव
करीब पांच हजार मीटर की गहराई पर महाकाली बहती है। नदी के उस पार नेपाल के गांव दिखते हैं। दोबांस एक ग्राम पंचायत का नाम है।
36 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली इस ग्राम पंचायत में 26 गांव शामिल हैं। इन गांवों के ज्यादातर लोगों को लोकसभा चुनाव की जानकारी तक नहीं है।
पिथौरागढ़ से दोबांस जाने के लिए पहले गाड़ी से 25 किमी मड़मानले जाना पड़ता है। यहां से कठपतिया तक छह किलोमीटर सड़क कटी है, लेकिन यह सड़क अभी वाहनों को चलाने के लिए पास नहीं है।
पांव फिसला तो सीधे 3000 मीटर गहरी खाई में
कठपतिया से धामीगौड़ा जाने के लिए दो किमी की खड़ी चढ़ाई है। दम भरने के लिए किसी चट्टान पर बैठना पड़ता है नहीं तो सांस फूल जाती है।
धामीगौड़ा से दोबांस मतदान केंद्र तक पांच किलोमीटर के रास्ते की चौड़ाई मात्र एक फीट है। इस मतदान केंद्र पर 800 मतदाता वोट डालेंगे। यदि किसी का पांव फिसला तो वह सीधे 3000 मीटर गहरी खाई में ही गिरेगा।
यहां सरकारी कारिंदे भले ही नजर न आते हों, लेकिन राह चलते यहां गुलदार से सामना होना आम बात है। प्राथमिक पाठशाला दोबांस में इस बार भी मतदान केंद्र बनेगा। यह स्कूल अति विशिष्ट दुर्गम की श्रेणी में आता है।
लोगों को मालूम नहीं मतदान की तारीख
महाकाली के किनारे बसे गांवों के लोग यहीं पर वोट डालेंगे। गांव में लोकसभा चुनाव की कोई हलचल नहीं है। पांच दिन पूर्व विधायक बिशन सिंह चुफाल कुछ पुराने घरों की छतों पर भाजपा का झंडा और हर-हर मोदी के पोस्टर चिपका गए।
चुनाव को लोग पंचायत चुनाव समझ रहे हैं। मतदान की तारीख ज्यादातर लोगों को मालूम नहीं है। सांसद का नाम लोग नहीं जानते।
प्रत्याशियों की जानकारी तो दूर की बात है। हां, एक साल में केजरीवाल जरूर यहां पहुंच गए क्योंकि सूखे नलों पर अरविंद केजरीवाल के स्टिकर चिपके दिखे।