हिमालय में बिखरे जीवाश्म और अवशेषों से यहां वन्य जीवों और वनस्पतियों के इतिहास के बारे में तो पता चल जाता है, लेकिन मानव यहां कब आबाद हुआ? कौनसी जनजातियां यहां पहले आईं? उनके सामाजिक संबंध कैसे विकसित हुए? इस राज से अब डीएनए पर्दा हटाएगा।
भारतीय मानव सर्वेक्षण (एएसआई) ने उत्तराखंड की पांच प्रजातियों के डीएनए सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं। इस जांच से हिमालय में मानव सभ्यता के विकास के नए अध्याय खुलेंगे। पांच करोड़ साल से विकसित हो रहे हिमालय में मिली अस्थियां आदि मानव के होने की पुष्टि तो कर रही हैं, लेकिन मानव सभ्यता का संगठित विकास यहां कब हुआ? इसका पता नहीं है।
मध्य हिमालयी क्षेत्र में राजी, बोक्सा, भूटिया, जौनसारी और थारू जनजातियां सदियों से रह रही हैं। अलग-अलग समय में इन जनजातियों ने हिमालयी क्षेत्र की कंदराओं को अपना आशियाना बनाया था। पुरातन काल के उनके रहने के तरीकों की निशानदेही तो हो रही है, लेकिन इनके अभ्युदय के साथ विकास के चरणों का रिकार्ड नहीं है।