माता सविंदर कौर के दर्शनों और स्टेज पर प्रस्तुति देने पहुंचे नेत्रहीन रोशन लाल के जीवन में ज्ञान का ऐसा प्रकाश फैला कि वह भिखारी से म्युजिक डायरेक्टर बन गए।
रोशन ने बताया कि अगर गुरु का ज्ञान नहीं मिलता तो आज भी किसी गली में भीख मांग रहा होता। गुरु के उजाले का ही कमाल है कि अब तक दो हजार से अधिक गाने गा चुका हूं।
संत निरंकारी मंडल की ओर से रविवार को कारगी बाईपास के समीप आयोजित कार्यक्रम में टिहरी से पहुंचे रोशन लाल ने अपनी टीम के साथ गढ़वाली में गीत गए। इस मौके के लिए उन्होंने विशेष तौर पर जगत कल्याणी माता गीत लिखा था। जो माता के उत्तराखंड आगमन पर गाया।
रोशन ने बताया कि जब वह 13 साल के थे तो उनकी माता का देहांत हो गया था। पिता की डांट से परेशान होकर वह ऋषिकेश जाकर भीख मांगने लगे। यहां गाना गाते और पैसे मांगते। भीख मांगते-मांगते वह टिहरी पहुंच गए और वहां भी यही काम करने लगे।