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‘डीएम’ शगुन कटारिया ने सुनी फरियाद, जारी किए कई निर्देश

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देहरादून। शनिवार को कलेक्ट्रेट में रोज की तरह फरियादियों की कतार लगी थी। तमाम अधिकारी अपनी अपनी फाइलें लेकर डीएम कार्यालय के बाहर खड़े हुए थे, लेकिन डीएम अंदर एक बालिका के साथ सरकारी वार्तालाप में व्यस्त थे। एकाएक बालिका उठी और डीएम व कई अधिकारी उसके साथ चल दिए और पूरे कलेक्ट्रेट का भ्रमण करने लगे। अधिकारी जिस बालिका के साथ चल रहे थे वह थी एक दिन की डीएम शगुन कटारिया। शगुन ने न सिर्फ लोगों की फरियाद सुनी बल्कि कई सरकारी मसलों में निर्देश भी जारी किए।
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दरअसल, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से एक दिन पूर्व कई स्कूलों और कॉलेजों की छात्राओं को जिला प्रशासन की ओर से सरकारी नीतियों से रूबरू कराने के लिए उन्हें एक दिन का अधिकारी बनाया गया था। इस दौरान उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई। सरकारी कामकाज के तौर तरीके उन्हें बताए गए। इसी कड़ी में शनिवार को जिलाधिकारी की कुर्सी पर एमकेपी कॉलेज में बीकॉम की छात्रा शगुन कटारिया को बैठाया गया। शगुन ने कलेक्ट्रेट के खनन, नजारत, संयुक्त कार्यालय, राजस्व अभिलेखागार, सूचना, निर्वाचन, आपदा प्रबंधन आदि विभागों का स्थलीय निरीक्षण किया। स्थलीय निरीक्षण उन्हें अपर जिलाधिकारी प्रशासन रामजीशरण शर्मा ने कराया।
भ्रमण के बाद एक दिन की डीएम ने कर्मचारियों के अवकाश के प्रार्थनापत्र और कई अन्य लोगों के प्रार्थनापत्रों पर सुनवाई की। जो लोग फरियाद लेकर आए थे, उनमें उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण करने और तत्काल उनके समाधान के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने कई तहसीलों और अन्य अधिकारियों से फोन पर भी वार्ता कर उन्हें विभिन्न कामों के संबंध में निर्देशित किया।
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एक दिन की डीएम के निर्देश
-दुल्हनी नदी में कचरा डंप करने संबंधी मामले में उपायुक्त नगर निगम को कार्रवाई के निर्देश।
-खेमचंद गुप्ता की भूमि सीमांकन के प्रार्थनापत्र पर उप जिलाधिकारी विकासनगर को निर्देश।
-हरियावाला खुर्द में भूमि सीमांकन के प्रार्थनापत्र पर उपजिलाधिकारी विकासनगर को कहा।
-शस्त्र लाइसेंस के विस्तारीकरण पर पुलिस वेरीफिकेशन के निर्देश।
-ध्यान सिंह राणा द्वारा पौड़ी जनपद से संबंधित सूचना के मामले में संबंधित जनपद को ट्रांसफर।
-नंदा की चौकी में एक पुश्तैनी जमीन के मामले में संबंधित अधिकारियों को भ्रमण के निर्देश।
मुझे लगता था आराम करते हैं अधिकारी
एक दिन की डीएम बनीं शगुन कटारिया ने कहा कि पहले मुझे लगता था कि दफ्तरों में अधिकारी आराम करते हैं। सुबह जाते हैं और फिर शाम को अपने घर पर आकर आराम करते हैं। बहुत मौज की नौकरी करते हैं सरकारी अधिकारी, लेकिन आज मेरी सोच पूरी तरह बदल गई है। मैंने आज देखा कि अधिकारियों को अपने अधीनस्थों की भी सुनते हैं और लोगों की समस्याएं भी। यही नहीं एक ही साथ उन्हें तमाम जगहों पर बात भी करनी होती है। अब मुझे पता चला कि अधिकारी जो काम करते हैं वह आसान तो बिल्कुल नहीं है। हां, यदि कोई मेहनती अधिकारी है तो वह इसे आसान बना जरूर लेता है।
पावर में आकर ही बदलना चाहती हूं सिस्टम
शगुन कटारिया ने कहा कि मैं हमेशा से यही मानती आई हूं कि खुद को पावर में रखकर ही सिस्टम को बदला जा सकता है। इसी लिए मैं खुद भी यूपीएसई की परीक्षा देकर प्रशासनिक अधिकारी ही बनना चाहती हूं, लेकिन पहले मुझे अपना नाम पूरा करना है। यानी शगुन कटारिया से पहले मुझे पीएचडी करने के बाद डॉ. शगुन कटारिया बनना है और फिर मैं भी असली डीएम बनना चाहती हूं। शगुन के पिता संजय कटारिया एक केबल नेटवर्क के डायरेक्टर हैं और माता एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं।
सीडीओ निकिता के साथ बैठीं एक दिन की सीडीओ निकिता
विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) निकिता खंडेलवाल का कार्यभार शनिवार को निकिता के पास ही रहा। जी हां, जिस बालिका को एक दिन का सीडीओ बनाया गया उनका नाम भी निकिता ही था बस उपनाम कन्नौजिया था। निकिता कन्नौजिया एमकेपी कॉलेज में बीए की छात्रा हैं।
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