फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड निकाय चुनाव: डीएम ने की मसूरी वार्ड-8 का चुनाव निरस्त करने की सिफारिश, ये है वजह

Wed, 22 May 2019 08:18 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
निकाय चुनाव - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

जिलाधिकारी ने निकाय चुनाव को लेकर मसूरी के वार्ड संख्या आठ का चुनाव निरस्त करने की सिफारिश करते हुए शासन को पत्र लिखा है। अब इस पर शासन को ही निर्णय लेना है। जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी मसूरी की जांच आख्या आने के बाद यह संस्तुति की है। आरोप है कि यहां की सभासद के पति का पालिका की लगभग सात बीघा भूमि पर अवैध कब्जा है, जिससे वे चुनाव लड़ने योग्य नहीं थीं, लेकिन इसका जिक्र उन्होंने नामांकन पत्र में नहीं किया था।

विज्ञापन


गत पांच अप्रैल को उच्च न्यायालय ने इस मसले में शासन को वार्ड संख्या आठ की सभासद गीता कुमाई का नामांकन निरस्त करने के लिए 60 दिन के भीतर जांच कराने के आदेश दिए थे। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने जांच उपजिलाधिकारी मसूरी को सौंपी थी।

इसमें सभी पहलुओं पर जांच हुई तो पाया गया कि गीता कुमाई ने अपने नामांकन पत्र में इस बात की जानकारी नहीं दी थी कि भरत कुमाई उनके पति हैं, जिनका कैमिल बैक स्थित सात बीघा भूमि पर कब्जा है। इस प्रकरण में पहले से ही मुकदमा भी चल रहा था, लेकिन दस्तावेज गुम हो जाने के कारण इसमें कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही थी। 
विज्ञापन


इसी बीच पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने इन दस्तावेजों को कलेक्ट्रेट स्थित रिकार्ड रूम से हासिल कर लिया। पता चला कि यह भूमि 1916 में मीट व वेजिटेबल मार्केट के लिए अधिग्रहित की गई थी। सभी पहलुओं पर जांच करते उपजिलाधिकारी मसूरी ने सभासद को नगर पालिका अधिनियम 1916 उत्तराखंड यथा संशोधित 2002 की धारा 13घ (पालिका की भूमि पर कब्जा या उससे लाभ पाना) का दोषी माना है। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन के अनुसार इस पर अब कार्रवाई धारा 40ख के तहत होनी है। इस धारा में कार्रवाई का अधिकार शासन को ही है। 

कब्जा हटाए जाने को लिखा था पत्र 
पिछले दिनों यह सिद्ध होने पर कि भूमि पर अवैध कब्जा सभासद के परिवार का ही है, इसे हटाए जाने की संस्तुति की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक जल्द कब्जा हटाए जाने की कार्रवाई को भी अमल में लाया जाएगा। 

ईओ ने ही दी थी एनओसी 
इस मामले में अधिशासी अधिकारी मसूरी नगर पालिका की भूमिका हैरान करने वाली है। दरअसल, 2018 में नामांकन के वक्त गीता कुमाई को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने वाले वाले भी अधिशासी अधिकारी ही थे और अब कब्जा हटाए जाने और प्रशासन के साथ जांच में भी वे ही शामिल रहे, जिन्होंने भूमि पर कब्जा होने की संस्तुति की है।   

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें