राज्य सरकार ने आपदा से प्रभावित पांच जिलों के कलक्टरों को जरूरत के हिसाब से सेवा निवृत तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो व पटवारी को संविदा पर रखने का अधिकार दे दिया है।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह आदेश दिए। उन्होंने कहा कि शासन में बैठे वरिष्ठ अफसर भी राहत कार्यों की जानकारी के प्रति अपडेट रहें। सीएम ने सभी डीएम से जान माल केनुकसान का वास्तविक आकलन सोमवार तक तलब किया है।
सीएम ने किया निर्देशित
समीक्षा बैठक में सीएम ने रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ व बागेश्वर के जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि इस बात की आवश्यकता महसूस होती है तो सेवानिवृत्त पटवारी, कानूनगो व नायब तहसीलदार को संविदा के आधार पर 28 फरवरी तक रख सकते हैं।
इससे राहत पहुंचाने के काम में तेजी आयेगी। मुख्यमंत्री ने संपर्क से कटे गांवों में निशुल्क खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन गांवों में राशन पहुंचाने की लागत जिला प्रशासन द्वारा वहन की जाए।
मुख्यमंत्री ने लापता व मृत व्यक्तियों की पत्नियों को 25-25 हजार रुपए की अतिरिक्त सहायता सीएम राहत कोष से देने को कहा। उन्होंने कहा कि जहां बिजली नहीं है वहां सोलर लाइटें वितरित हो।
शनिवार को जिलाधिकारियों केसाथ राहत कार्यों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग केमाध्यम से समीक्षा केदौरान जिलाधिकारियों को हिदायत दी कि नुकसान की जानकारी वास्तविकता के अनुरूप हो। ताकि केंद्र से सहायता की मांग उसी के अनुरूप की जाए।
सोमवार तक प्रस्तुत होगा आंकलन
राज्य में दैवीय आपदा से वास्तव में जो हानि हुई है, उसका आंकलन कर पूरा विवरण सोमवार तक प्रस्तुत करने के निर्देश भी अफसरों को दिए हैं। सीएम ने बाढ़ नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा।
चारधाम व हेमकुंड साहिब के लिए वैकल्पिक मार्ग की योजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, उत्तराखंड की सहायता के लिए तत्पर है। बैठक में मुख्य सचिव सुभाष कुमार, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, एफआरडीसी बीपी पाण्डेय, प्रमुख सचिव गृह ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी समेत कई अफसर मौजूद रहे।