आपदा पीड़ित परिवारों को अब जिला प्रशासन के स्तर पर ज्यादा राहत राशि मिल सकेगी। शासन ने करीब 15 वर्ष पूर्व आपदा मोचन निधि से दी जाने वाली राहत राशि की दरों में संशोधन किया है।
इसके तहत जिलाधिकारी को 50 हजार रुपये से अधिक राहत राशि देने की पावर दी गई है। कुछ इसी तर्ज पर एसडीएम और तहसीलदारों द्वारा जारी की जाने वाली राशि की सीमा बढ़ाकर पांच से 10 गुनी तक कर दी गई है। राज्य में प्राकृतिक आपदा से ग्रस्त परिवारों को विभिन्न प्रकार से सहायता प्रदान करने की व्यवस्था है। इसी में प्रदेश के सभी जिलों में प्रशासनिक अफसरों को आपदा मोचन निधि से राहत राशि मंजूर करने के अधिकार दिए गए हैं।
10 दिसंबर 2001 में जारी एक शासनादेश के तहत तहसीलदारों को दो हजार रुपये तक, एसडीएम को पांच हजार रुपये तक और जिलाधिकारी को 50 हजार रुपये तक राहत राशि मंजूर करने की पावर थी। शासन के सूत्रों की मानें तो डेढ़ दशक का समय बीतने के बाद अब यह राशि बेहद कम है।
लिहाजा, इसमें संशोधन के संबंध में आला अधिकारियों के बीच लंबी चर्चा हुई। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली राहत राशि की दरों में बढ़ोत्तरी की बात तय करते हुए शासनादेश जारी किया गया है।
इसके तहत तहसीलदार अब दो हजार के बजाए दस हजार तक, एसडीएम पांच हजार के बजाए 50 हजार तक और जिलाधिकारी 50 हजार से अधिक की राशि आपदा प्रभावितों को अपने स्तर से जारी कर सकेंगे। राजस्व और वित्त की सहमति के बाद जारी हुए आदेश सभी जिलाधिकारियों को भेज दिया गया है।