दिवाली में खुशियां खूब मनाएं, लेकिन पर्यावरण की स्वच्छता का ख्याल रहे। पटाखों से तौबा कर पर्यावरण को बचाने के भागेदारी बनें।
पर्यावरण को बचाने की अपील
दिवाली के मद्देनजर उत्तराखंड पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लोगों से यह अपील की है। बोर्ड के सदस्य सचिव विनोद सिंघल का कहना है कि पटाखे के इस्तेमाल से पर्यावरण प्रदूषण दो-तीन गुना अधिक हो जाता है।
यह पर्यावरण को तो प्रदूषित करता है ही, हमारी सेहत पर भी बुरा प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार पर्यावरण में प्रदूषण फैलने से सांस संबंधी बीमारियां बढ़ने लगती हैं। बोर्ड के सदस्य ने कहा कि दीपावली में पटाखों से तौबा करें। खुशियां मनाएं, घरों में दीये जलाएं। इससे रोशनी होगी, लेकिन प्रदूषण नहीं फैलेगा।
कूडे़ को जलाना भी खतरनाक
दिवाली पर पटाखों एवं पैकेट खाद्य वस्तुओं के इस्तेमाल से बहुत सारा कूड़ा भी एकत्रित हो जाता है। सफाई के बाद ज्यादातर लोग कूड़े को जला देते हैं, यह भी खतरनाक है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऐसा करने से भी मना किया है।
बोर्ड अफसरों का कहना है कि अक्सर लोग दीपावली के मौके पर घर की सफाई करते हैं। जो कूड़ा-कचरा निकलता है, उसे घर के बाहर जला देते हैं। इससे भी हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है।
2013 की स्थिति
दिवाली से पहले (29 अक्तूबर)
नेहरू कॉलोनी- 104.78
घंटाघर- 134.54
रायपुर- 147.54
(नोट- माप माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर में)
दिवाली के बाद (तीन नवंबर)
नेहरू कॉलोनी- 397.96
घंटाघर- 227.03
रायपुर- 244.76
(नोट- माप माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर में)