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संकल्प लीजिए! पटाखे नहीं, दीये जलाएंगे

Thu, 31 Oct 2013 11:35 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून में ईको फ्रेंडली दिवाली की मुहिम रंग ला रही है। शहर के लोग लगातार इससे जुड़ रहे हैं। अब चार कॉलेजों की 90 छात्राओं ने पटाखामुक्त दिवाली मनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि रोशनी के पर्व पर दीये जलाएं, पटाखे नहीं।
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दिवाली की ग्रीटिंग कार्ड
बुधवार को फूल चंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कालेज में स्वयं संस्था की ओर से आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में छात्राओं ने दिवाली से संबंधित ग्रीटिंग कार्ड बनाए। गोष्ठी में छात्राओं ने कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति ने त्योहार का स्वरूप बिगाड़ दिया है।

दीयों की जगह अब बिजली की लड़ियां लगाई जाती हैं, जिन पर खासी ऊर्जा खर्च होती है। वहीं, पटाखों की तेज आवाज और धुआं लोगों को बीमारियां बांटता है। इस दौरान प्रिंसिपल डा. कुसुम रानी नैथानी, कौशल्या डोभाल, मोना बाली, मंजू सक्सेना, विमला कठैत आदि मौजूद रहीं।
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ये छात्राएं रहीं अव्वल
ग्रीटिंग कार्ड: फूल चंद रानी शिल्प मंदिर की शिवानी कौशल प्रथम, जीजीआईसी राजपुर रोड की ऋतु सैनी द्वितीय और यहीं की सुरभि तृतीय
दीया पेंटिंग: जीजीआईसी राजपुर रोड की पूजा खत्री प्रथम, यहीं की रिमझिम द्वितीय और एमकेपी की यासमीन तृतीय

बोलीं छात्राएं
मैं तो पहले से ही दिवाली पर पटाखे नहीं जलाती। दीये जलाकर घर को रोशन करती हूं। और लोगों को भी जागरूक करूंगी।
-ऋतु सैनी, जीजीआईसी राजपुर रोड
 
पटाखे जलाने से पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। दुर्घटना का खतरा बना रहता है। पटाखे जलाने जरूरी हैं तो ये सीमित हों, ज्यादा धुएं वाले नहीं।
-ईशा रानी, फूलचंद नारी शिल्प मंदिर इंटर कालेज

दिवाली पर लोग तेज आवाज, धुएं वाले पटाखे छोड़ते हैं। इससे खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
-रिमझिम कुमारी, जीजीआईसी राजपुर रोड

आतिशबाजी से प्रदूषण होता है और तेज आवाज भी परेशान करती है। किसी को दिक्कत न हो, इसलिए मैं सिर्फ दीये जलाकर यह त्योहार मनाऊंगी।
-प्रिया, एमकेपी इंटर कालेज

अब लोग दीयों की जगह प्लास्टिक की लड़ियां जलाने लगे हैं। यह पर्यावरण के लिहाज से कतई ठीक नहीं है। इससे ऊर्जा भी बहुत खर्च होती है।
-मंजू सक्सेना, उपाध्यक्ष स्वयं संस्था
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