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Diwali 2020 : प्रधानमंत्री की अपील को महिलाएं कर रहीं साकार, गोबर के दीये जलाकर मनाई जाएगी दिवाली

Wed, 11 Nov 2020 04:19 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal नरेश थपलियाल, अमर उजाला, कोटद्वार

सार

  • गोबर के दीयों से आएगी ग्रामीण महिलाओं के जीवन में रोशनी
  • एकेश्वर ब्लॉक के सात गांवों की महिलाएं जुटी दीये बनाने में, हाथों-हाथ बिक रहे हैं दीये
  • गोबर में गेरू मिलकर बनाए जा रहे हैं आकर्षक रंग-बिरंगे, डिजाइनर दीये
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- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दीपावली में स्वदेशी उत्पाद अपनाओ की अपील को एकेश्वर ब्लाक की महिलाएं साकार कर रहीं हैं। सात गांव की महिलाओं ने कड़ी मेहनत से गाय के गोबर से तैयार किए गए आकर्षक दीये बाजार में उतारे हैं। लोग इन दीयों को हाथों हाथ खरीद रहे हैं। अब यह गोबर के दीये महिलाओं की आर्थिकी को भी मजबूत कर रहे हैं। 
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- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार की आजीविका मिशन कार्यक्रम के तहत चार माह पूर्व प्रगति आजीविका संघ से जुड़ी छह महिलाओं ने एकेश्वर ब्लाक के माध्यम से गोबर से दीये बनाने का प्रशिक्षण लिया। दीये बनाने के लिए गोबर के साथ गेरू मिलाकर इसे सांचों में डालकर दीयों को आकार दिया जा रहा है। साथ ही दीयों को आकर्षक बनाने के लिए उन पर अलग-अलग रंग लगाने के साथ ही डिजाइन बनाए जा रहे हैं, जिससे लोग उन्हें हाथों-हाथ खरीद लें।

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- फोटो : अमर उजाला
संघ की कोषाध्यक्ष करिश्मा रावत ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने दीये स्थानीय बाजार में बिक्री के लिए उतारे। दीयों के आकर्षक होने के कारण वे हाथों हाथ बिक गए। दीयों की डिमांड बढ़ते ही गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ लिया। वर्तमान में बड़ेथ, मलेथा, पंचूर, पातल, मैैटाकुंड, इसोटी और थापला गांव की 13 महिलाएं दीये बनाने में जुटीं हैं। 

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- फोटो : अमर उजाला
अब उनके पास स्थानीय बाजार से लेकर बड़े शहरों से भी डिमांड आने लगी है। धाद संस्था की उपाध्यक्ष माधुरी रावत ने बताया कि गोबर के दियों की डिमांड कोटद्वार में भी बढ़ गई है। कोटद्वार की बीईएल कॉलोनी के बाहर 11 नवंबर को और जीआईसी कोटद्वार में 12 नवंबर को महिलाओं के द्वारा गोबर के दीयों का स्टॉल लगाया जाएगा। एक दीये की कीमत पांच रुपये रखी गई हैै। 
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- फोटो : अमर उजाला
आजीविका मिशन योजना के तहत एकेश्वर ब्लाक के थापला गांव की महिलाओं को गोबर के दीये बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। महिलाएं चार महीने में पांच हजार से अधिक दीयों का उत्पादन कर चुकी हैं। 
- मनोज भट्ट, सहायक खंड विकास अधिकारी  एकेश्वर 
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