संघ की कोषाध्यक्ष करिश्मा रावत ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने दीये स्थानीय बाजार में बिक्री के लिए उतारे। दीयों के आकर्षक होने के कारण वे हाथों हाथ बिक गए। दीयों की डिमांड बढ़ते ही गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ लिया। वर्तमान में बड़ेथ, मलेथा, पंचूर, पातल, मैैटाकुंड, इसोटी और थापला गांव की 13 महिलाएं दीये बनाने में जुटीं हैं।