देहरादून। उत्तराखंड मुक्त विवि की ओर से दून विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में नई शिक्षा नीति और दिव्यांगता अध्ययन पर चर्चा की गई।
संगोष्ठी का शुभारंभ सांसद तीरथ सिंह रावत ने किया। उन्होंने कहा कि मुक्त विवि उच्च शिक्षा पाने वाले वंचितों के लिए लाभदायक साबित हो रहा है। उत्तराखंड मुक्त विवि अपने उद्देेश्य में खरा उतर रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोे. ओपीएस नेगी ने कहा कि मुक्त शिक्षा या दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का तात्पर्य है कहीं भी, कभी भी, कोई भी शिक्षा अपनी सुविधा अनुसार ले सकता है। यहां न तो कोई सीटों का बंधन है न कोई उम्र का। आज ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा का युग है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय इन दोनों क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहा है। दिव्यांगता को दूर करने और दिव्यांजनों को सशक्त बनाने के लिए नई शिक्षा नीति 2019 में दिव्यांगता शिक्षा को भी प्रभावी रूप से शामिल करना चाहिए। श्री देव सुमन राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीपी ध्यानी ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में हमारा देश तथा राज्य काफी आगे है, लेकिन गुणवत्तापरक शिक्षाप्रदान करने में हम काफ ी पीछे हैं। इसके लिए हमें प्रसास करने होंगे। इस दौरान ईशु सिंह, शलोनी सिंह, कमल गहतोरी, ओंकार नाथ तथा नेहा कुमारी ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर दून विश्वविद्याल के कुलसचिव डॉ. एमएस मंद्रवाल, प्रो. एचसी पुरोहित, प्रो. केडी पुरोहित आदि मौजूद रहे।