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धनोल्टी सीट पर ‘मल्ल’ युद्ध में कांग्रेस चित

Fri, 03 Feb 2017 10:21 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : Self
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धनोल्टी विधानसभा सीट से मनमोहन मल्ल को चुनाव मैदान से हटने का हुक्म देने वाले कांग्रेस आलाकमान को खुद अपने फैसले से पीछे हटना पड़ा है। आलाकमान के हुक्म के बावजूद मल्ल चुनाव लड़ने की जिद पर अड़े रहे। अब पार्टी की प्रदेश चुनाव प्रभारी कुमारी शैलजा को भी कहना पड़ रहा है कि मल्ल कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी हैं।
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बता दें कि नामांकन वापसी की ठीक एक दिन पहले कांग्रेस आलाकमान ने धनोल्टी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी प्रीतम पंवार को समर्थन देने का फैसला किया था। मगर फैसला करने से पहले पार्टी सिंबल का आवंटन कर चुकी थी और इस सीट पर मनमोहन सिंह मल्ल ने पर्चा भर दिया था।

आलाकमान के इस निर्णय के बाद मल्ल के मैदान से हटने की संभावना बन गई थी। मगर मल्ल ने नामांकन वापस लेने से साफ इंकार कर दिया। इस दौरान मल्ल को हटाने या न हटाने को लेकर कांग्रेस दिग्गजों और कार्यकर्ताओं के बीच तर्कों का जमकर युद्ध हुआ। मगर मल्ल नहीं डिगे। यही नहीं पार्टी आलाकमान ने चुनाव प्रभारी कुमारी शैलजा को भी मोर्चे पर उतारा। उनकी कोशिशें भी नाकाम रही। नामांकन वापसी के बाद भी मल्ल चुनाव से नहीं हटे तो पार्टी ने उनकी जिद के आगे हार मान गई।
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कांग्रेस भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान पहली बार चुनाव प्रभारी कुमारी शैलजा के सामने मल्ल को लेकर सवाल उठा तो उन्होंने पहली बार स्पष्टता के साथ मल्ल को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी स्वीकार किया। सवाल पर हैरानी जताते हुए उन्होंने कहा,‘ मल्ल को पार्टी ने सिंबल दिया है, वह पार्टी के प्रत्याशी हैं।

तो ये प्रीतम को कांग्रेस की ‘फिरकी’ थी
धनोल्टी सीट पर मनमोहन सिंह मल्ल के मामले में कांग्रेस के डबल स्टैंड को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि कहीं ये प्रीतम पंवार को कांग्रेस की ‘फिरकी’ तो नहीं है। इस सीट पर पिछला चुनाव लड़ चुके मल्ल करीबी अंतर से चुनाव हारे थे। पार्टी के टिकट आवंटन के मानकों के हिसाब से उन्हें टिकट मिलना तय माना जा रहा था। उनकी दावेदारी तब और भी मजबूत मानी गई जब टिकट के दूसरे दिग्गज दावेदार जोत सिंह बिष्ट उनके समर्थन में दौड़ से हट गए। इसके बावजूद पार्टी आलाकमान ने प्रीतम पंवार को समर्थन देने का एलान किया। पार्टी की ओर से यह तर्क  दिया गया कि गठबंधन सहयोगियों को पार्टी ये प्रस्ताव दे चुकी थी कि या तो वे पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ें या लिखित में समर्थन मांगें। अब सवाल उठ रहे हैं कि पार्टी मल्ल को मैदान में रखना था तो फिर प्रीतम को ‘फिरकी’ क्यों दी?  
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