पौड़ी जिले की चार सीटों पर भाजपा ने नए चेहरे उतारकर भले ही जीत के लिए समीकरण बदलने का प्रयास किया हो, लेकिन लैंसडौन और श्रीनगर को छोड़कर अन्य चारों सीटों चौबट्टाखाल, कोटद्वार, पौड़ी और यमकेश्वर सीट पर भाजपा के भीतर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है।
कोटद्वार, पौड़ी और चौबट्टाखाल सीटों पर जहां कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध किया है, वहीं यमकेश्वर सीट भी इससे अछूती नहीं है। कोटद्वार में हरक सिंह रावत के आने से जहां यह सीट हॉट हो गई है, वहीं हरक के सामने कांग्रेस के दिग्गज स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी का लड़ना तय माना जा रहा है।
भाजपा ने इस बार यमकेश्वर से लगातार तीन बार जीत का हैट्रिक लगाने वाली विजया बड़थ्वाल के ऊपर विश्वास नहीं किया, वहीं चौबट्टाखाल से सीटिंग विधायक तीरथ सिंह रावत को भी किनारा कर लिया। भाजपा में वापसी के बाद गत लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए दिन रात एक करने वाले पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह रावत का टिकट काटने को पार्टी कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे हैं।
भाजपा द्वारा घोषित प्रत्याशियों की सूची पर नजर डाले तो पौड़ी जिले की कुल छह सीटों में वर्ष 2012 में जिन छह लोगों को प्रत्याशी बनाया गया था, उनमें से केवल दो को ही दोबारा प्रत्याशी बनाया है, जबकि चार लोगों को टिकट से वंचित कर दिया।
वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा ने श्रीनगर सीट से धन सिंह रावत, पौड़ी से घनानंद, चौबट्टाखाल से तीरथ सिंह रावत, यमकेश्वर से विजया बड़थ्वाल, लैंसडौन से दिलीप रावत और कोटद्वार से पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी को प्रत्याशी बनाया था, जबकि इस बार केवल धन सिंह रावत और दिलीप रावत ही इस सूची में अपना टिकट बचाने में सफल हो पाए। सीटिंग विधायकों में विजया बड़थ्वाल और तीरथ सिंह रावत का टिकट कटने से पार्टी कैडर निराशा से उबर नहीं पा रहे हैं। कोटद्वार में तो कार्यकर्ताओं ने शैलेंद्र सिंह रावत पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का दबाव बनाया है।
चौबट्टाखाल से सतपाल महाराज और कोटद्वार से हरक सिंह रावत को मैदान में उतारने से जिले की ये दोनों विधानसभा सीटे अब हॉट सीट की श्रेणी में आ गई हैं। वहीं पौड़ी से मुकेश कोली और यमकेश्वर से ऋतु खंडूड़ी राजनीतिक मोर्चे पर पहली बार विधानसभा की जंग लड़ेंगे। ऋतु खंडूड़ी के रुप में पार्टी के दिग्गज बीसी खंडूड़ी की अगली पीढ़ी को राजनीति में स्थापित करने की कोशिश समझा जा रहा है, जिससे पार्टी को भविष्य में भी खंडूड़ी की स्वच्छ छवि और पूर्व सैनिक पृष्ठभूमि का लाभ मिलता रहे।