फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कहीं हार का कारण न बन जाए उक्रांद की आपसी रार   

Sun, 15 Jan 2017 12:39 PM IST
सुनीत द्विवेदी/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
उक्रांद कार्यालय - फोटो : UKD Website
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। मैदान भी सज गया है। इसमें जीत की उम्मीद रखने वाले योद्धा भी उतर चुके हैं, लेकिन जिन दलों के साथ गठबंधन कर उक्रांद चुनाव लड़ने की तैयारी में था, उनसे बात नहीं बन रही है।
विज्ञापन


आपसी रार उन्हें चुनाव में हार का स्वाद चखा सकती है। पहाड़ पर दल के जमीनी हालात भी लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। ऐसे में कहीं न कहीं यह चुनाव उक्रांद का भविष्य भी तय कर देगा।

युवा नेतृत्व में उत्तराखंड क्रांति दल से उम्दा प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन यह उम्मीदें टूटती दिख रही हैं। हालांकि पिछले कुछ समय से केंद्रीय अध्यक्ष पुष्पेश त्रिपाठी भी सक्रिय दिखे। जिससे लगा कि उक्रांद सूबे में फिर से अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगा। लेकिन, भाकपा, माकपा और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के साथ सीटों पर आपसी सहमति बनती नहीं दिख रही है। ऐसे में उक्रांद को तगड़ा झटका लग सकता है।
विज्ञापन


हालांकि अब भी उक्रांद के आला नेता अन्य दलों को मनाने में जुटे हैं। ऐसे में आपसी ‘रार’ कब तक खत्म होगी, यह कह पाना मुश्किल है। 

क्यों नहीं बन पा रही सहमति
भाकपा मसूरी सीट से अपना प्रत्याशी उतारना चाहती है, लेकिन उक्रांद भी अपना उम्मीदवार इस सीट से उतारना चाहता है। कुछ इसी तरह उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी अपने केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी को द्वाराहाट से लड़वाना चाहती है। जबकि इस सीट से उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष खुद ताल ठोंक रहे हैं।

वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी 25 सीटों पर अपने प्रत्याशी की सूची पहले ही तैयार कर चुका है। ऐसे में उक्रांद, गठबंधन के जिस सियासी फार्मूले के तहत चुनाव लड़ना चाह रहा था, वह सफल होता नहीं दिख रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें