सोमवार को दोपहर बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए अमृता रावत ने कैबिनेट से उनके इस्तीफे संबंधी सभी अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि वह कैबिनेट से इस्तीफा नहीं देंगी।
सतपाल महाराज के बीजेपी में शामिल होने के बाद अमृता रावत द्वारा इस्तीफा देने की खबरों ने जोर पकड़ा हुआ था। वैसे, कांग्रेस का एक धड़ा अमृता को मंत्रिमंडल से हटाने की भी मांग कर रहा है।
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बहुगुणा समर्थक विधायक इस कोशिश में हैं कि मंत्रिमंडल में जगह खाली हो तो उनमें से किसी को मौका मिले। हालांकि अमृता से मंत्री पद छीनने की मांग का कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश ने खुलकर विरोध जताया है।
उनका कहना है अमृता तीन बार की कांग्रेस विधायक हैं। उन्होंने मुझे आश्वस्त किया है कि वह कांग्रेस में ही रहकर सेवा करेंगी।
ऐसे में हम सबको मिलकर काम करना चाहिए। फिलहाल दून से बाहर अमृता रावत सोमवार को यहां पहुंच रही हैं।
प्रतिद्वंद्विता और दबाव की राजनीति ने पैर पसारे
उत्तराखंड कांग्रेस में मचा घमासान ऊपर से फिलहाल भले शांत दिखने लगा हो, लेकिन तीन गुटों में बंटी पार्टी में विधायकों की महत्वाकांक्षाएं, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और दबाव की राजनीति ने पैर पसार लिए हैं।
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सतपाल महाराज के पार्टी छोड़ने से मची हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के घर शनिवार को हुई समर्थक विधायकों की बैठक में ‘राजनीतिक सौदेबाजी’ पर कुछ विधायकों व मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से नाराजगी जताई है।
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हालांकि दबाव की राजनीति के सवाल पर मुख्यमंत्री ने रविवार को कहा कि विजय बहुगुणा ने उन्हें जो ‘गुरुमंत्र’ दिया है, उससे पार्टी में सब ठीक हो जाएगा।
सभी साथियों को बराबर सम्मान और दायित्व सौंपेगे
शनिवार की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा अध्यक्ष का पद भी बहुगुणा समर्थक विधायकों को देने की मांग उठी थी।
इंदिरा ह़दयेश का कहना है कि उन्हें देहरादून में हुई ऐसी बैठक की जानकारी अखबारों से मिली। पद मांगे जाने की पुष्टि हुई है। उनका कहना है मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि सभी साथियों को बराबर सम्मान और दायित्व सौंपेगे।
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इस बीच बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने उत्तराखंड के बड़े नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले को सावधानी के साथ हैंडल करें।
बीते दो दिनों में कांग्रेस नेताओं ने बारी-बारी से अपने विधायकों व मंत्रियों को दून बुलाकर टटोलने का काम किया है।
'मैं उत्तराखंड कांग्रेस सरकार नहीं तोड़ रहा'
भाजपा नेता सतपाल महाराज का कहना है कि उनका इरादा उत्तराखंड की सरकार गिराने या तोड़ने का नहीं है।
उनका कहना है कि जो विधायक व्यक्तिगत रूप से हमसे जुड़े थे वह कांग्रेस के विधायक हैं। जब उनका ह्दय परिवर्तन होगा तब देखेंगे।
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मेरा लक्ष्य उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटें जिताकर नरेन्द्र मोदी को मजबूत करना है। इसके लिए मैं जल्द ही उत्तराखंड का दौरा करुंगा। इसकेअलावा पूरे देश में जहां भी मेरे अनुयायी हैं उन जगहों में प्रचार के लए जाऊंगा।
'जो भी है अमृता रावत को कहना है'
कांग्रेस से विधायकों से लगातार मुलाकात कर रहे मुख्यमंत्री हरीश रावत का मंत्री अमृता रावत को लेकर कहना है कि उन्होंने उनसे कोई बात नहीं की है।
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जो कुछ भी कहना है अमृता रावत को कहना है। उन्होंने फिलहाल किसी परिवर्तन या अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि सरकार स्थिर है।
सभी विधायक पार्टी के प्रति निष्ठावान हैं। पार्टी की प्राथमिकता लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देना है।