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मंत्री और विधायक के खिलाफ मेयर ने उगली आग

Fri, 12 Feb 2016 04:18 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून के विकास के मुद्दे पर मेयर विनोद चमोली और कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल के बीच शुरू हुआ वाकयुद्ध सीमाएं लांघने लगा है।
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दोनों धुरंधरों के बीच चल रहे आरोप प्रत्यारोप की सियासत में बुधवार को मंत्री के पक्ष में कांग्रेस विधायक राजकुमार के कूदने पर अब मेयर के तेवर और कड़े हो गए हैं। बृहस्पतिवार को मेयर ने मंत्री अग्रवाल को दून के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा करार देने के साथ विधायक राजकुमार को कब्जा सम्राट करार दिया है।

मेयर ने पत्रकारों को बताया कि दिनेश अग्रवाल यह बताएं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोसेसिंग यूनिट की फाइल वन मंत्रालय में एक वर्ष के आसपास लंबित क्यों  रही। शासन स्तर पर अड़ंगा लगाया जाता रहा। वह बोले कि उन्होंने व्यक्तिगत प्रयास कर मुख्यमंत्री से इसकी स्वीकृति कराई थी।
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चमोली ने कहा कि नगर निगम के एमएनए हरक सिंह रावत के तबादले के पीछे मंत्री का हाथ बताया। अतिक्रमणकारियों व कब्जा धारकों के खिलाफ चलने वाले अभियानों में भी मंत्री अग्रवाल हस्तक्षेप करते रहे हैं। कैबिनेट मंत्री तीन साल में अपने विधानसभा क्षेत्र में एक फ्लाईओवर तक नहीं बनवा पाए।

मेयर विधायक राजकुमार पर हमलावर हुए। उन्होंने सवाल किया कि पांच ई रिक्शा देकर वह क्या साबित करना चाहते हैं? पांच में से तीन ई रिक्शा खराब हैं। मन्नूगंज नाले को ढकने पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं देने के पीछे कई ठोस कारण रहे। वह बोले कि स्थानीय लोग लगातार नाले को ढके जाने का विरोध करते रहे हैं। यह आपत्ति आज भी जारी है।

इसके साथ ही शासन की एक कमेटी ने भी इस परियोजना पर विरोध जताया था। मेयर ने कहा कि हाउस टैक्स पर प्रदेश सरकार ने नगर निगम की नाक में दम कर रखा है। विधायक राजकुमार तो मलिन बस्ती नियमितीकरण समिति के अध्यक्ष हैं। आखिर वह हाउस टैक्स पर सरकार को राजी क्यों नहीं करते हैं? सरकार की दोहरी नीति के कारण लाखों मलिन बस्तीवासियों के हित खतरे में पड़े हुए हैं।

क्या मेयर की एमएनए हरक सिंह से सांठ गांठ थी
मेयर विनोद चमोली के बयान पर कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि अपनी विफलता छिपाने के लिए आक्रामक होना मेयर की आदत बन चुकी है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को लटकाए जाने पर उन्होंने कहा कि यह मामला प्रमुख सचिव वन व पर्यावरण के संज्ञान में था।

उन्हें तो इसकी जानकारी भी नहीं थी। आखिर मेयर ने मुझसे सीधी बातचीत क्यों नहीं की? जब मेरे को इस बाबत पता ही नहीं था तो वह कार्य एक तय तरीके से ही तो होगा। तत्कालीन एमएनए हरक सिंह रावत के स्थानांतरण के बारे में अग्रवाल ने कहा कि अधिकारियों का ट्रांसफर होना सामान्य सी बात है। अफसर आते जाते हैं।

क्या मेयर की उनसे कोई सांठ गांठ थी? फ्लाईओवर के बाबत कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इसका डिजाइन बदला गया है। अब यह वी शेप में बनाया जाएगा। इसलिए देरी हो रही है। अमृत योजना में मेयर अपना दोष खुद स्वीकार कर रहे हैं। मैं भी तो यही कह रहा था कि अमृत योजना में धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के साथ अन्याय हो रहा है।

मेयर ने नगर निगम की सैंकड़ों बीघा पर कराया कब्जा
विधायक व संसदीय सचिव राजकुमार ने मेयर विनोद चमोली के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की सैंकड़ों बीघा जमीन पर अवैध कब्जे व अतिक्रमण है। उन पर माल व शापिंग कांप्लेक्स बनाए जा रहे हैं। यह सब मेयर के संरक्षण में हो रहा है।

मेयर की संपत्ति की जांच सीबीआई द्वारा की जानी चाहिए। मन्नू गंज पर नाले बनाने का विरोध शासन स्तर पर भले ही वर्ष 2008 में हुआ हो लेकिन अब शासन ने हरी झंडी दे दी है। नगर निगम द्वारा एनओसी न दिए जाने पर यह स्वीकृति उन्होंने विधानसभा से ले ली है।

मलिन बस्तियों में हाउस टैक्स लगाए जाने पर शासन के विरोध पर संसदीय सचिव राजकुमार ने कहा कि यह सरासर गलत आरोप है। नगर निगम को अधिकार है कि वह मलिन बस्तियों में गृह लगाए। मेयर जानबूझकर गलत तरीके से सरकार पर हमला कर रहे हैं। लेकिन वहां भी मेयर ने रोड़ा अटका दिया।
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जहां तक पांच में से तीन बैटरी वाली गाड़ियों के खराब होने की बात है तो उनका रखरखाव करने की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नगर निगम को 18 वाहन दिए लेकिन उनका उपयोग नहीं किया जा रहा।
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