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घोषणाओं के फ्रंट पर घिरेगी ‘सरकार’

Wed, 03 Feb 2016 04:07 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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पूर्वसैनिकों और पूर्व अर्द्धसैनिकों के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत करने के लिए सीएम से बुधवार को चाय पर चर्चा में कई मुद्दे उठेंगे।
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फौजियों के कल्याण का दम भरने वाली कांग्रेस सरकार के सामने यह चुनौती है कि घोषणाओं को चुनाव से पहले किस तरह पूरा किया जाए। सरकार के लिए अर्द्धसैनिक बलों को पूर्वसैनिकों के सम्मान कल्याण योजनाओं संचालित करना आसान नहीं रहेगा।

सीएम से चाय पर चर्चा के लिए पूर्वसैनिक और अर्द्धसैनिक बल के पूर्व कार्मिक अपना अपना एजेंडा रखेंगे। पूर्वसैनिकों के कई बिंदु हैं जिसमें राज्य सैनिक कल्याण परिषद के ढांचे में बदलाव, कल्याण योजनाओं में धनराशि में की गई वृद्धि प्रभावी नहीं होने के अलावा उपनल में रोजगार जैसे मुद्दे हैं।
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वहीं, अर्द्धसैनिक कल्याण की सबसे बढ़ी मांग अलग से निदेशालय का गठन सरकार के लिए सबसे बढ़ी चुनौती है। देहरादून में निदेशालय खोलने के साथ दोनों मंडलों के लिए अलग मंडल कार्यालय की घोषणा और दो करोड़ के बजट प्रावधान के बावजूद अभी तक धरातल पर कुछ नहीं उतरा है।

अर्द्धसैनिक चाहते हैं बराबरी
- वर्ष 2004 के पश्चात भर्ती अर्द्धसैनिकों के लिए सेना की भांति पुराने पेंशन नियम।
- सेना की भांति पूर्व अर्द्धसैनिक बल कार्मिकों को भी वन रैंक वन पेंशन।
- 8 फरवरी 2014 के शासनादेशों को प्रभावी बनाए राज्य सरकार।
- पुलिस मेडल प्राप्त कार्मिकों को मिले सैन्य वीरता पदकों के समान सुविधाएं।
- अर्द्धसैनिक बलों की कैंटीन (सीपीसी) में दोपहिया, चौपहिया वाहन खरीद पर मिले छूट।
- अर्द्धसैनिकों बलों की कैंटीन से शराब खरीद पर जारी शासनादेश हो संशोधित।

बजट की कमी कैसे होगी पार
- वीरता पदक विजेताओं के लिए  2.32 करोड़ चाहिए बजट में मिले 72 लाख
- अशोक चक्र श्रंखला सीरीज के पदक विजेताओं को 63 लाख के सापेक्ष मिले 10 लाख
- सैनिक कल्याण विश्राम गृहों के निर्माण के लिए एक करोड़ की मांग पर कोई बजट नहीं
- सैनिक पुनर्वास संस्था के लिए 6 करोड़ के प्रस्ताव पर नहीं मिला बजट
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