केदारनाथ घाटी में 16-17 जून को मची तबाही के बाद भी प्रदेश में आपदा प्रबंधन अभी बैकफुट पर ही है। ऐसे में लग रहा कि जैसे सरकार ने आपदा पीड़ितों को ठंड में मारने की तैयारी कर रखी है।
कोई काम नहीं हो पाया
लंबे इंतजार के बाद हुई राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में महज एसडीआरएफ के गठन को हरी झंडी देने के अलावा और कोई काम नहीं हो पाया।
पढ़ें, पुलिस में भर्ती के नाम पर 'पुलिस' ने ही लगाया चूना
इतना जरूर है कि आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति को आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने केलिए सुझाव देने का काम जरूर सौंपा गया।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से कई मसलों पर नीतिगत फैसले लेने की उम्मीद भी की जा रही थी।
पढ़ें, यौन शोषणः 'डीजीपी और ममता बोहरा ने रची कहानी'
पुनर्वास के मसले को छोड़ भी दिया जाए तो मौसम में आ रहे बदलाव को देखते हुए कई समस्याएं हैं जिनका सामना करने की तैयारी अब राज्य को करनी है।
महज औपचारिकता
विशेषज्ञों के मुताबिक लोगों को इस बात के लिए भी तैयार करना है कि आपदाओं के इस दौर में अपने आप को कैसे इस तरह से ढाले की आपदाओं का प्रभाव उन पर कम से कम पड़े।
आपदा तंत्र को कैसे इतना मजबूत किया जाए कि आपदा के बाद के बचाव और राहत के काम को तेजी से अंजाम दिया जा सके। आपदाओं के पूर्वानुमान को कैसे सटीक किया जाए। खासकर सामुदायिक स्तर पर आपदा से निपटने के लिए तैयारी बहुत जरूरी है।
पढ़ें, फिर सीमा लांघ गए कृषि मंत्री हरक सिंह रावत
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में उम्मीद की जा रही थी कि इन मुद्दों पर भी सरकार का ध्यान जाएगा। पर प्राधिकरण की बैठक महज औपचारिकता में सिमट कर रह गई।
प्राधिकरण की मुहर लगना जरूरी था
एसडीआरएफ के गठन को अंतिम रुप देने के लिए प्राधिकरण की मुहर लगना जरूरी था और बैठक भी यहीं तक सिमट कर रह गई। इतना जरूर हुआ कि आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने के लिए आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति को रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया।
आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य के मुताबिक सलाहकार समिति को रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। रिपोर्ट पर अमल किया जाएगा।