टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक की नैलचामी पट्टी के थार्ती गांव के ऊपर सौड़ नामे तोक में बृहस्पतिवार देर रात 12.30 बजे बादल फटने से शंकर सिंह बुटोला का मकान मलबे की चपेट में आ गया।
बादल फटने और गांव के समीप बह रहे नैलचामी गदेरे के उफान का शोर सुनकर घर के अंदर सो रहे परिवार के मुखिया शंकर सिंह बुटोला, उनकी पत्नी बचनदेई और पोती स्नेहा बाहर आ गए, लेकिन दूसरे कमरे में सो रहीं उनकी पुत्र वधू मकानी देवी (35 वर्ष) और पोता सुरजीत (7 वर्ष) मलबे में दब गए।
दूसरी पोती सपना भी बाहर आते हुए मलबे में फंस गई थी, ग्रामीणों ने ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे लिया। लेकिन मकानी देवी और सुरजीत की मौत हो गई। वहीं, चमोली जिले में देवाल ब्लॉक के फल्दिया गांव में भी बादल फटने से भारी तबाही मची है।
यहां मां और बेटी मलबे के सैलाब में दबकर लापता हो गईं। बृहस्पतिवार देर रात करीब 10 बजे बमणबेरा गांव के ऊपर चीड़ के जंगल में बादल फटने के बाद तेज गर्जना के साथ मलबे का सैलाब फल्दिया गांव के पास आया तो गांव में अफरातफरी मच गई।
इसी दौरान रमेश राम का मकान मलबे की चपेट में आ गया। जान बचाने को रमेश राम अपनी बुजुर्ग माता और दिव्यांग बेटी को तेजी से बाहर लेकर निकल गए। उनके पीछे उनकी पत्नी पुष्पा देवी (27 वर्ष), बेटी ज्योति (7 वर्ष) और परिवार के अन्य बच्चे भी चल पड़े।
इसी दौरान पुष्पा देवी और ज्योति मलबे में दब गईं। पूरे दिन खोजबीन के बाद भी उनका पता नहीं चल सका। वहीं, ल्वाणी गांव का मत्स्य पालन केंद्र भी सुरक्षित नहीं बचा। बगड़ीगाड़ डिग्री कॉलेज के करीब 20 कमरों में मलबा भर गया है। डीएम और एसडीएम ने मौका मुआयना कर स्थिति का जायजा लिया।
उधर, टिहरी जिले की कीर्तिनगर तहसील की ग्राम पंचायत थाती डागर में बादल फटने से आए मलबे और पानी ने भारी तबाही मचाई है। यहां कुलेड़ी गदेरे के समीप स्थित दो गोशालाओं में पानी घुसने से दो खच्चर बह गए। प्रशासन ने खतरे को देखते हुए दो परिवारों को पंचायत भवन में शिफ्ट किया है।
वहीं उत्तरकाशी जिले के विभिन्न हिस्सों में गुरुवार की रात से रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है। यहां गुरुवार देर रात पुरोला प्रखंड के दूरस्थ मोरेत्रा बुग्याल में आकाशीय बिजली गिरने से शिकारू गांव के ग्रामीणों की दो सौ ज्यादा भेड़-बकरियों की मौत हो गई है।
भेड़-बकरियों की मौत की सूचना पर पुरोला तहसील प्रशासन की टीम मौके के लिए रवाना हो चुकी है। वहीं नंदगांव के पत्थरगाड़ में उफान आने से कृषि भूमि और फसल को नुकसान पहुंचा है।