नगर पंचायत के सैंजी वार्ड में बुधवार की आधी रात को बारिश आफत बनकर आई। बारिश के साथ आए मलबे से गांव में एक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
विज्ञापन
जबकि 26 अन्य परिवारों के मकान, दुकान और गौशालाओं में मलबा भर गया। हालांकि कर्णप्रयाग हाईवे भी रात में कुछ देर के लिए मलबे से बाधित हो गया था।
जिससे बृहस्प्तिवार सुबह चालू कर दिया गया। इधर नुकसान की सूचना पर तड़के तहसील प्रशासन भी मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य की कार्रवाई की।
बुधवार रात्रि करीब साढ़े ग्यारह बजे सैंजी गदेरे ने गांव में कहर बरपाया। बारिश के पानी के साथ आए मलबे से गांव के प्रेम सिंह पुत्र स्व. बलवंत सिंह का मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
मकान में प्रेम सिंह सहित अन्य तीन भाइयों का परिवार एक साथ रहता था। बताया कि मलबे की आहट और ग्रामीणों के शोर शराबे से परिवार वालों में भागकर जान बचाई।
विज्ञापन
मकान, दुकान और गौशालाओं में घुसा मलबा
बारिश के कहर से रात भर गांव में अफरा तफरी का माहौल रहा। मकान क्षतिग्रस्त होने से प्रेम सिंह के पूरे परिवार का सामान मलबे में दफन हो गया। यही नहीं मलबे की चपेट में आने से गौशाला भी क्षतिग्रस्त हो गई।
हालांकि गौशाला में बंधे मवेशियों को भी आनन फानन में खोलकर भगा दिया गया था। बृहस्पतिवार देर शाम तक गांव में आए मलबे को हटाने की कार्यवाही जारी थी।
मकान, दुकान और गौशालाओं में घुसा मलबा
बारिश से आए सैंजी नाले के उफान के साथ आए मलबे से कुलदीप सिंह, जयवीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, विजय सिंह, सुरेंद्र प्रसाद,दिवान सिंह, देवी दत्त, आनंद सिंह, सुरेंद्र सिंह, राम सिंह, गजे सिंह, रतन सिंह, बलवंत सिंह, नरेंद्र सिंह, त्रिलोक सिंह, उमापति, जगमोहन, चंद्रमोहन, ओम प्रकाश, बलवंत सिंह, दिनेश सिंह, कमला देवी आदि के घर, आंगन, गौशालाएं, दुकान मलबे से पटे हैं।
प्रशासन ने बांटे कंबल और जरूरी सामग्री
घटना के बाद मौके पर पहुंचे तहसील प्रशासन ने प्रभावितों को कंबल और जरूरी सामग्री का वितरण किया। एसडीएम स्मृता परमार, तहसीलदार बीडी जोशी और राजस्व उपनिरीक्षक विजयपाल सिंह गुसाईं ने बताया कि प्रभावित प्रेम सिंह और अन्य प्रभावितों को 8 कंबल और दो तिरपाल दिए गए हैं। साथ 5000 रूपये की अहेतुक राशि दी गई। जबकि रहने के लिए पंचायत घर सहित गांव में खाली पड़े एक मकान में कर दी गई।
11 दिन पहले छिना मां का आंचल, अब छिनी छत
सैंजी निवासी प्रेम सिंह के परिवार पर कुदरत की दोहरी मार पड़ी है। 11 दिन पहले प्रेम सिंह की मां लीला देवी का निधन हो गया था। शुक्रवार 30 जून को स्व. लीला देवी की तेरवीं होनी थी। जिसके लिए सभी सामान घर में जमा किया था। लेकिन बुधवार की रात्रि के कहर ने जहां प्रेम सिंह के परिवार के सिर से छत छीन ली। वहीं मां की तेरवीं के लिए एकत्रित किया गया पूरा सामान भी मलबे में बह गया।
नहीं हुए सुरक्षा के प्रबंध
सैंजी गांव के आनंद सिंह कहते हैं कि गांव में पहाड़ी से आने वाला सैंजी गदेरे बरसों से खतरा बना है। बताया वर्ष 1957-58 में यहां बादल फटने से गदेरा उफान पर आया जिसमें एक बालिका की मौत हो गई थी। वहीं 2006-7 में भी गांव के गदेरे के मलबे ने चपेट में ले लिया है। जिसमें अधिकतर घरों में मलबा घुस गया था। तब से ग्रामीण गदेरे से सुरक्षा के उपाय की मांग कर रहे हैं। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।